दिल्ली CBI की राजस्थान में बड़ी दबिश, बांसवाड़ा से 4 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार…
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की दिल्ली टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है। करोड़ों रुपये की ठगी के मामलों में वांछित आरोपी संजीव दीक्षित को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी लंबे समय से फरार था और फर्जी पहचान के सहारे धार्मिक स्थलों में छिपकर रह रहा था। इस गिरफ्तारी से ठगी के एक बड़े नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।
बांसवाड़ा में CBI की सटीक कार्रवाई, धर्मशाला से गिरफ्तारी
CBI सूत्रों के मुताबिक, आरोपी संजीव दीक्षित को त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की धर्मशाला से पकड़ा गया। आरोपी यहां लंबे समय से फर्जी नाम और पहचान के साथ रह रहा था। धार्मिक स्थल को छिपने की जगह बनाकर वह खुद को साधारण व्यक्ति के रूप में पेश कर रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
2016 से था फरार, दर्ज हैं एक दर्जन से अधिक केस
CBI के अनुसार, संजीव दीक्षित वर्ष 2016 से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ करीब 4 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े मामलों सहित एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। आरोपी पर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों में ठगी की वारदातों को अंजाम देने के आरोप हैं।
मुखबिर की सूचना पर रची गई गिरफ्तारी की रणनीति
CBI को पुख्ता सूचना मिली थी कि आरोपी बांसवाड़ा क्षेत्र में छिपा हुआ है। इसके बाद CBI इंस्पेक्टर रोशनलाल और धनसिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से निगरानी की और सटीक इनपुट के आधार पर आरोपी को धर दबोचा।
फर्जी दस्तावेज और अलग-अलग नामों से देता रहा चकमा
जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग नामों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पुलिस और जांच एजेंसियों को लगातार गुमराह करता रहा। वह अपनी पहचान छुपाने के लिए साधु-संतों और सामान्य यात्रियों की तरह धार्मिक स्थलों पर ठहरता था, ताकि उस पर किसी का ध्यान न जाए।
ठगी के बड़े नेटवर्क की आशंका, कई सहयोगी रडार पर
CBI अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। एजेंसी को शक है कि संजीव दीक्षित अकेले नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह के साथ मिलकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। पूछताछ में उसके सहयोगियों, फर्जी खातों और ठगी के पैसों के लेन-देन से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
जल्द हो सकते हैं और बड़े खुलासे
CBI अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी के बाद ठगी के कई पुराने मामलों में भी नई कड़ियां जुड़ सकती हैं। आरोपी को जल्द ही अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।