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ट्रांसफर के बाद भी नहीं छूटा ‘वसूली का खेल’, रिश्वत लेते CBI के हत्थे चढ़ा ASIग्रेटर कैलाश इलाके में अवैध दखल और 25 लाख की डिमांड, पहली किस्त लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने साउथ दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के एक एएसआई को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोपी पर आरोप है कि उसने प्रॉपर्टी विवाद में हस्तक्षेप कर पीड़ित से 25 लाख रुपये की मांग की थी। पहली किस्त के रूप में 10 लाख रुपये लेते समय उसे रंगे हाथ पकड़ा गया।

जांच में सामने आया है कि आरोपी एएसआई पहले ग्रेटर कैलाश थाने में तैनात रह चुका था और वर्तमान में सीआर पार्क थाने में पोस्टेड था। इसके बावजूद वह ग्रेटर कैलाश थाना क्षेत्र में पहुंचा और कथित रूप से पीड़ित को धमकाकर पैसों की मांग की। सूत्रों के अनुसार, जिस इलाके में सीबीआई की रेड हुई, वह ग्रेटर कैलाश थाना क्षेत्र में आता है, जहां आरोपी की कोई आधिकारिक ड्यूटी नहीं थी।

प्रॉपर्टी विवाद से शुरू हुआ मामला

दो भाइयों के विवाद में एएसआई की एंट्री से बिगड़े हालात

एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2024 में प्रेम सूद और उनके भाई सुरेश कुमार सूद के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान पुलिस को कॉल की गई, जो ग्रेटर कैलाश थाने को ट्रांसफर हुई। मौके पर पहुंचे एएसआई सुंदर पाल सिंह की यहीं से परिवार से जान-पहचान हुई। बाद में इसी संपर्क का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया।

कथित खरीदार से मिलवाकर सौदे की कोशिश

पुलिसिया पहचान का इस्तेमाल कर प्रॉपर्टी डील में दखल

आरोप है कि एएसआई ने अपनी पहचान का लाभ उठाते हुए प्रेम सूद को एक कथित खरीदार दविंद्र सलवान से मिलवाया। वर्ष 2025 में दोनों के बीच संपत्ति बेचने का एक समझौता भी कराया गया। शुरुआती तौर पर 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन पूरी रकम न मिलने के कारण सौदा अधूरा रह गया।

नया खरीदार, नया दबाव
6.75 करोड़ की पेशकश के बहाने दोबारा सौदे की कोशिश

एफआईआर में बताया गया है कि फरवरी 2026 में आरोपी एएसआई एक नए कथित खरीदार को लेकर पहुंचा, जिसने संपत्ति के लिए 6.75 करोड़ रुपये की पेशकश की। इसके बाद पुराने सौदे को रद्द कराने और नए समझौते के लिए दबाव बनाया गया।

फर्जी केस में फंसाने की धमकी

समझौता रद्द कराने के नाम पर 2.5 करोड़ की मांग, ASI ने मांगे 25 लाख

आरोप है कि एएसआई ने कथित खरीदार की ओर से पुराने समझौते को रद्द कराने के बदले 2.5 करोड़ रुपये नकद देने की बात कही। वहीं, खुद के लिए 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। रकम नहीं देने पर पीड़ित को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।

SHO की भूमिका पर भी सवाल

ट्रांसफर के बाद भी थाने की ‘पहचान’ दिखाने का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने दबाव बनाने के लिए ग्रेटर कैलाश थाने के SHO को पीड़ित के घर तक ले जाकर यह जताने की कोशिश की कि ट्रांसफर के बावजूद उसका पुलिस तंत्र पर असर बना हुआ है। हालांकि फिलहाल SHO के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन विजिलेंस जांच की चर्चा है।

जांच में खुलेंगी और परतें
CBI खंगाल रही नेटवर्क और अवैध वसूली का पैटर्न

CBI अब यह जांच कर रही है कि आरोपी एएसआई ने अपने पद का दुरुपयोग कर किस तरह प्रॉपर्टी विवादों में दखल दिया और करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की कोशिश की। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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