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सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिद पर चला बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र के अस्ती गांव में प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अवैध रूप से बनी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। देर रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब ढाई घंटे तक चले अभियान में तीन बुलडोजरों की मदद से सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

अस्ती गांव में सरकारी खलिहान भूमि पर बनी मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला तहसीलदार कोर्ट से होते हुए अपर जिलाधिकारी न्यायिक कोर्ट और फिर उच्च न्यायालय तक पहुंचा। सभी स्तरों पर अतिक्रमण को अवैध माना गया और बेदखली के आदेश को सही ठहराया गया। 25 मार्च को उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने भी इस मामले में रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन को कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। हालांकि अदालत ने पूर्व में लगाए गए जुर्माने को राहत देते हुए माफ कर दिया।

तीन दशक पुराना बताया गया अतिक्रमण

प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 648 की भूमि खलिहान के रूप में सुरक्षित थी, जिस पर करीब 30 साल पहले अतिक्रमण कर धार्मिक ढांचा खड़ा किया गया था। इस मामले में तहसीलदार कोर्ट ने 28 फरवरी 2025 को बेदखली का आदेश देते हुए 36 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके खिलाफ संबंधित पक्षकारों ने अपील की, लेकिन अपर जिलाधिकारी न्यायिक कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2025 को अपील खारिज कर दी। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां से भी प्रशासन के पक्ष में फैसला आया।

देर रात कड़ी सुरक्षा के बीच चला अभियान

प्रशासन ने कार्रवाई को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारी की थी। गांव के चारों ओर भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गई थी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो। देर रात करीब तीन बजे अधिकारियों की मौजूदगी में तीन बुलडोजरों ने कार्रवाई शुरू की। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में आवाजाही पर भी अस्थायी रोक लगाई गई थी। पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए रखी।

ढाई घंटे में पूरी तरह हटाया गया अतिक्रमण

करीब ढाई घंटे तक चले इस अभियान में अवैध निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। मौके पर एडीएम वित्त एवं राजस्व, एसडीएम, एडीसीपी, एसीपी और तहसीलदार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है और सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन आगे भी निगरानी बनाए हुए है।

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