बजट सत्र में बढ़ा सियासी टकराव: राहुल गांधी पर कार्रवाई की मांग, लोकसभा में हंगामे से कार्यवाही स्थगित..
संसद के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोकने की मांग करते हुए प्रस्ताव नोटिस दिया है।
नरवणे की किताब के जिक्र से शुरू हुआ विवाद
बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक का हवाला दिया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे संवेदनशील विषय बताते हुए कांग्रेस नेता पर गैर-जिम्मेदार बयान देने का आरोप लगाया। इसके बाद सदन में तीखी बहस शुरू हो गई।
निशिकांत दुबे का प्रस्ताव, आजीवन प्रतिबंध की मांग
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में प्रस्ताव नोटिस देकर राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त करने की मांग की। उन्होंने इसे विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं बताते हुए राहुल गांधी के कथित विदेशी संगठनों से संपर्क और विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश विरोधी ताकतों से जुड़े रहे हैं और उन्हें चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान बना कारण
यह घटनाक्रम राहुल गांधी के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को “पूर्ण आत्मसमर्पण” बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से देश की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित प्रभावित होंगे। भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
स्पीकर कक्ष में प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग का आरोप
केंद्रीय मंत्री किरेण रिजीजू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि कांग्रेस के 20-25 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में जबरन प्रवेश किया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। भाजपा ने दावा किया कि इस दौरान एक सांसद ने अवैध रूप से वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया। पार्टी ने इसे संसदीय मर्यादा का गंभीर उल्लंघन बताया है।
बीजेपी ने कहा—संसदीय गरिमा से समझौता नहीं
भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी लोकतांत्रिक बहस और चर्चा में विश्वास रखती है, लेकिन किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव की राजनीति स्वीकार्य नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि संयम नहीं बरता जाता तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती थी। भाजपा ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस का रुख—आरोप एकतरफा
कांग्रेस की ओर से अब तक विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि सांसद शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे और सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए आरोप लगा रही है।
सदन की कार्यवाही स्थगित, समीक्षा जारी
लगातार हंगामे के कारण 12 फरवरी 2026 को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्रालय और लोकसभा सचिवालय पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहे हैं। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित सांसदों के खिलाफ आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
बढ़ते विवाद और तीखी बयानबाजी ने संसद की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों पक्ष इस टकराव को किस तरह सुलझाते हैं और क्या सदन की कार्यवाही सामान्य हो पाती है।