‘बॉर्डर 2’ के लिए दिलजीत दोसांझ ने तोड़ा अपना उसूल, वजह जानकर कहेंगे— पाजी तुसी ग्रेट हो
फिल्म बॉर्डर 2 का नया गाना ‘घर कब आओगे’ रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि इस गीत के लिए दिलजीत दोसांझ ने अपने करियर का एक निजी उसूल तोड़ दिया। हाल ही में एक लाइव सेशन के दौरान उन्होंने खुद बताया कि क्यों उन्होंने यह गाना गाने का फैसला किया और इसके पीछे कौन-सी वजह थी।
🔹 ‘संदेसे आते हैं’ की नई झलक: चुनौती थी बड़ी
1997 की सुपरहिट फिल्म बॉर्डर का आइकॉनिक गाना ‘संदेसे आते हैं’ आज भी देशभक्ति और जज़्बात की पहचान है। बॉर्डर 2 में इसी भावना को नए अंदाज में पेश किया गया है— नए वर्जन का नाम है ‘घर कब आओगे’।
पुराने क्लासिक को नए रूप में ढालना मेकर्स के लिए एक बड़ा रिस्क था, लेकिन शुरुआती प्रतिक्रियाएं बता रही हैं कि गाने की आत्मा को बरकरार रखा गया है।
🔹 “ऐसे गाने से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए”— दिलजीत का साफ मत
दिलजीत दोसांझ ने अपने लाइव सेशन में बताया कि जब उन्हें पता चला कि ‘संदेसे आते हैं’ का नया वर्जन बनाया जा रहा है, तो वह शुरुआत में इसके पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि इतना यादगार गाना दोबारा छेड़ना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसे गाने भावनाओं से जुड़े होते हैं और उनमें बदलाव करना आसान नहीं होता।
🔹 मिथुन का नाम सुनते ही बदला फैसला
दिलजीत के मुताबिक, जब उन्हें यह जानकारी मिली कि इस नए गाने को संगीतकार मिथुन कंपोज कर रहे हैं, तो उनका भरोसा बन गया। उन्होंने कहा कि मिथुन पहले भी संवेदनशील और प्रभावशाली म्यूजिक दे चुके हैं, इसलिए उन्हें यकीन हो गया कि नया वर्जन सही दिशा में जाएगा।
यही वह मोड़ था, जहां दिलजीत ने अपने पहले वाले विचार पर दोबारा सोचा।
🔹 बीमारी के बावजूद एक दिन में पूरी की रिकॉर्डिंग
दिलजीत ने यह भी बताया कि जब उनसे गाना गाने के लिए कहा गया, तब वह पूरी तरह फिट नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने अपना हिस्सा रिकॉर्ड किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने एक ही दिन में डबिंग और सिंगिंग दोनों का काम पूरा कर लिया। खास बात यह रही कि वह आमतौर पर हिंदी गाने कम गाते हैं, लेकिन इस गाने की भावना ने उन्हें इसके लिए तैयार कर दिया।
🔹 “सोनू निगम की आवाज़ हमेशा याद आएगी”
क्लासिक ‘संदेसे आते हैं’ का ज़िक्र करते हुए दिलजीत ने कहा कि वह गाना आज भी अमर है और जब भी बजता है, सबसे पहले सोनू निगम की आवाज़ याद आती है।
उन्होंने माना कि शुरुआत में रीमेक को लेकर उन्हें डर था, लेकिन जब उन्होंने फाइनल वर्जन सुना तो वह भी धीरे-धीरे उससे संतुष्ट हो गए।
🔹 सम्मान के साथ किया गया रीक्रिएशन
दिलजीत दोसांझ का इस गाने के लिए अपने उसूल से हटना दिखाता है कि उन्होंने इसे सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक ज़िम्मेदारी के तौर पर लिया।
बॉर्डर 2 का ‘घर कब आओगे’ न तो मूल गीत की जगह लेने की कोशिश करता है और न ही उसकी आत्मा को कमजोर करता है, बल्कि उसी भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करता है। यही वजह है कि यह गाना रिलीज होते ही लोगों के दिलों से जुड़ता नजर आ रहा है।