#देश दुनिया #धार्मिक #राज्य-शहर

बिहार का ‘भूतों का मेला’: माघी पूर्णिमा पर उमानाथ घाट पर रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा

आधी रात का सन्नाटा और डरावना मेला

बाढ़ (बिहार) के उमानाथ घाट पर माघी पूर्णिमा के मौके पर हर साल एक ऐसा अनोखा और डरावना मेला लगता है, जिसे देख किसी भी कमजोर दिल वाले व्यक्ति की रूह काँप जाए। जब आधी रात के सन्नाटे में ढोलक और मंजीरे की थाप तेज होती है और गंगा की लहरों के बीच चीखें गूंजने लगती हैं, तो समझ जाइए कि ‘भूतों का मेला’ शुरू हो चुका है।


श्रद्धालुओं की भीड़ और ‘ऊपरी साया’

उमानाथ घाट पर हजारों लोग दूर-दराज के जिलों से आते हैं—पटना, नालंदा, नवादा, जमुई, शेखपुरा। ये लोग अपने शरीर में आए ‘ऊपरी साये’ का अनुभव कराने के लिए यहां पहुंचते हैं। भीड़ में महिलाएं और पुरुष बाल खोलकर, हाथों में लाठियां और नीम की टहनियां लेकर नाचते हैं।


भूतखेली का खौफनाक मंजर

ढोलक की तेज़ थाप के बीच महिलाएं सिर घुमाती हैं, जमीन पर गिरती हैं और मंत्रोच्चार करती हैं। भगत लोग लाठियों से प्रहार करते हुए ‘भूत उतारने’ का दावा करते हैं। यह दृश्य किसी हॉरर फिल्म जैसा प्रतीत होता है।


अंधविश्वास या ईश्वरीय शक्ति?

स्थानीय लोग इसे सदियों पुरानी परंपरा बताते हैं, जिसे ‘बाबा बख्तौर की देन’ कहा जाता है।

  • नालंदा से आए सोनू भगत का मानना है कि यह कोई प्रेत बाधा नहीं, बल्कि भगवान का रूप है जो शरीर में आता है।
  • नवादा के मोनू कहते हैं कि दुनिया इसे अंधविश्वास कह सकती है, लेकिन यहां आने वाले इसे भगवान का साक्षात अनुभव मानते हैं।

उत्तरायण गंगा और धार्मिक महत्व

बाढ़ में गंगा का प्रवाह उत्तरायण होने के कारण घाट का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

  • शनिवार शाम से ही रेलवे स्टेशन और सड़कों पर भीड़ बहुत ज्यादा रहती है।
  • लाखों श्रद्धालु अस्थाई शेल्टर और स्टैंड्स पर रात गुजारते हैं।
  • ‘भूतखेली’ का यह डरावना सिलसिला पूरे दो दिनों तक चलता रहता है।

डरावना, पर आस्था से भरा अनुभव

इस मेला में धार्मिक आस्था और लोक परंपरा का मिश्रण दिखाई देता है।

  • भले ही बाहरी लोग इसे अंधविश्वास कहें, स्थानीय लोग इसे भगवान के रूप और शक्ति का अनुभव मानते हैं।
  • आधी रात के सन्नाटे में डरावना नजारा और गंगा का उत्तरायण प्रवाह मिलकर इसे बिहार की अनोखी धार्मिक परंपरा बनाते हैं।
author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *