बिहार चुनाव 2025: सीट जीते बिना भी चमकी जनसुराज की ताकत—15 लाख वोट लेकर बनी तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति…
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भले ही जनसुराज पार्टी एक भी सीट अपने नाम नहीं कर पाई, लेकिन वोट प्रतिशत और प्रभाव के आंकड़ों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। करीब 15 लाख वोट हासिल कर पार्टी राज्य की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी। 238 सीटों में से 35 सीटों पर निर्णायक असर बताते हैं कि जनसुराज का जनाधार अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
सीट नहीं जीती, लेकिन वोट बैंक ने दिलाई बड़ी पहचान
जनसुराज पार्टी सीटें जीतने में पिछड़ गई, लेकिन वोट शेयर ने विरोधियों को चौंका दिया। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी का यह प्रदर्शन बताता है कि जनता विकल्प तलाश रही थी और जनसुराज उस खाली जगह को भरने में सफल रहा।
15 लाख वोटों ने बनाया तीसरा सबसे बड़ा राजनीतिक विकल्प
इस चुनाव में लगभग 15 लाख वोट हासिल कर पार्टी ने खुद को जेडीयू और आरजेडी के बाद एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित किया। वोटों का यह आंकड़ा संगठन की पकड़ और जमीनी अभियान की सफलता को दर्शाता है।
35 सीटों पर निर्णायक असर—कई दावेदारों के समीकरण बिगाड़े
238 सीटों में से 35 सीटों पर जनसुराज ने मुकाबले को सीधे प्रभावित किया। कई जगहों पर प्रत्याशी दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जिससे पारंपरिक राजनीतिक दलों के वोट बैंक में अप्रत्याशित गिरावट देखने को मिली।
पोल एक्सपर्ट इसे “किंगमेकर टाइप इंफ्लुएंस” बता रहे हैं।
चुनावी रणनीति और ग्राउंड कैंपेन बने सफलता की रीढ़
जनसुराज के कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव, पंचायत-पंचायत तक पहुंचकर अलग अंदाज़ में चुनावी प्रचार किया। डिजिटल अभियानों और पारदर्शिता पर आधारित संदेशों ने युवाओं को भी बड़ी संख्या में जोड़ने में मदद की।
आगे की राजनीति में बढ़ सकती है भूमिका—समीकरणों में नया मोड़ संभव
विश्लेषकों का मानना है कि सीट न जीतने के बावजूद जनसुराज आने वाले वर्षों में गठबंधन राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वोट बैंक का बढ़ता आकार भविष्य में पार्टी की bargaining power को मजबूत करेगा।