भिवाड़ी ब्लास्ट के बाद उजागर हुआ ‘बारूद का अंडरग्राउंड नेटवर्क’: दो और अवैध पटाखा फैक्ट्रियों पर छापा, – सात मजदूरों की जिंदा जलकर मौत मामले में मालिक और मैनेजर गिरफ्तार , तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिए
भिवाड़ी। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट के बाद प्रशासन ने बारूद के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस दर्दनाक हादसे में सात मजदूरों की जिंदा जलकर मौत के मामले में फैक्ट्री मालिक हेमंत और मैनेजर अभिनंदन को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। आरोप है कि यह अवैध कारोबार पुलिस विभाग में तैनात योगेश पंडित की शह पर चल रहा था।
हादसे की राख ठंडी भी नहीं हुई थी कि ब्लास्ट स्थल से महज 500 मीटर की दूरी पर दो और अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और गोदामों का खुलासा हो गया। कागजों में इन इकाइयों को स्टील फैब्रिकेशन और वॉशिंग पाउडर निर्माण की अनुमति मिली थी, लेकिन अंदर बड़े पैमाने पर पॉप-अप पटाखों का निर्माण और विस्फोटक सामग्री का भंडारण चल रहा था। पुलिस-प्रशासन ने फैक्ट्रियों को सीज कर दिया है।
यह भी सामने आया कि दोनों औद्योगिक भूखंड रीको की अनुमति के बिना किराये पर दिए गए थे, जो रीको भू-निपटान नियम 1979 और लीज शर्तों का उल्लंघन है। प्रशासन ने एक मामले में 45 दिन और दूसरे में 90 दिन का कारण बताओ नोटिस जारी कर भूखंड निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हादसे के बाद चलाए गए सघन अभियान में खुशखेड़ा, टपूकड़ा, चौपानकी और फेज-3 सहित औद्योगिक क्षेत्रों की 315 इकाइयों की जांच की गई। जयपुर रेंज के आईजी राघवेंद्र सुहास ने भिवाड़ी का दौरा कर पुलिस-प्रशासन की संभावित मिलीभगत की गहन जांच का भरोसा दिलाया।
सात मजदूरों की मौत मामले में पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों हेमंत शर्मा और अभिनंदन को न्यायलय में पेश कर तीन दिन का रिमांड लिया है पुलिस अभी इनसे और गहनता से पूछताछ करेगी
यह मामला सिर्फ अवैध फैक्ट्री संचालन का नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में निरीक्षण और निगरानी तंत्र की गंभीर विफलताओं का आईना है। कागजों में वैध गतिविधियों की आड़ में वर्षों तक विस्फोटक सामग्री का निर्माण और भंडारण होता रहा—और नियमित निरीक्षण के बावजूद यह सब कैसे अनदेखा होता रहा? अब यह सवाल सीधे प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की नीयत पर खड़े हो गए हैं।