🔴 बरेली हिंसा केस में अहम मोड़, नाजिम रज़ा को हाईकोर्ट से सशर्त राहत
प्रयागराज से बड़ी खबर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2025 को हुई बरेली हिंसा के मामले में आरोपी बनाए गए नाजिम रज़ा खान को सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं था और वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद था।
⚖️ हाईकोर्ट का अहम फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक वर्मा की सिंगल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नाजिम रज़ा खान की जमानत अर्जी स्वीकार की। यह जमानत ट्रायल कोर्ट में मुकदमे के लंबित रहने तक प्रभावी रहेगी और इसे कुछ शर्तों के साथ मंजूर किया गया है।
🔍 मौलाना तौकीर रज़ा का करीबी बताया जाता है नाजिम
नाजिम रज़ा खान को बरेली हिंसा के कथित मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रज़ा खान का करीबी माना जाता है। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने जांच के दौरान बाद में उसका नाम आरोपियों की सूची में जोड़ा था।
📝 एफआईआर में नहीं था नाम, जांच में बाद में जोड़ा गया
याची पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर में कुल 28 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। नाजिम रज़ा खान का नाम एफआईआर में नहीं था, बल्कि जांच के दौरान बाद में जोड़ा गया, जो जमानत का मजबूत आधार बना।
📜 इन गंभीर धाराओं में दर्ज था मुकदमा
नाजिम रज़ा खान के खिलाफ बारादरी थाना, बरेली में बीएनएस की कई गंभीर धाराओं—190, 191(2), 191(3), 121, 125, 124(4), 352, 351(3), 109, 299, 223, 61(2) और क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया गया था।
👥 सह-आरोपी को पहले मिल चुकी है जमानत
याची पक्ष ने समानता (Parity) का हवाला देते हुए बताया कि इसी मामले में सह-आरोपी मुस्तकीम उर्फ मोहम्मद मुस्तकीम को 24 नवंबर 2025 को पहले ही जमानत मिल चुकी है, ऐसे में नाजिम रज़ा को भी राहत मिलनी चाहिए।
⏳ लंबी हिरासत और आपराधिक इतिहास न होना बना आधार
कोर्ट को बताया गया कि नाजिम रज़ा खान 29 सितंबर 2025 से जेल में बंद है और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी आश्वासन दिया कि जमानत मिलने पर वह कानून का पालन करेगा और किसी भी तरह से जांच या ट्रायल को प्रभावित नहीं करेगा।
🚫 राज्य सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया गया। सरकार का तर्क था कि मामला गंभीर प्रकृति का है और आरोपी की भूमिका संदिग्ध रही है। हालांकि, कोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए जमानत देना उचित माना।
📊 कानूनी विश्लेषण
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एफआईआर में नाम न होना, लंबी न्यायिक हिरासत और सह-आरोपी को पहले जमानत मिलना—ये तीनों पहलू किसी भी जमानत याचिका में निर्णायक माने जाते हैं। हाईकोर्ट का यह फैसला ट्रायल के दौरान आरोपी के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने की दिशा में देखा जा रहा है।
🔎 आगे क्या?
अब मामला ट्रायल कोर्ट में चलेगा। नाजिम रज़ा खान को दी गई जमानत सशर्त है और किसी भी शर्त के उल्लंघन पर इसे रद्द किया जा सकता है।