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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन तय: BNP को बहुमत, तारिक रहमान बनेंगे अगले प्रधानमंत्री20 साल बाद वापसी की ओर बीएनपी

बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने निर्णायक बढ़त बनाते हुए बहुमत हासिल कर लिया है। लगभग दो दशकों बाद पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है। मतगणना गुरुवार देर रात तक जारी रही और अनौपचारिक नतीजों ने बीएनपी गठबंधन की स्पष्ट जीत के संकेत दिए।

211 सीटों के साथ बहुमत की ओर

अनौपचारिक परिणामों के अनुसार, बीएनपी गठबंधन ने 299 में से 287 सीटों की मतगणना पूरी होने तक 211 सीटें जीत ली हैं। वहीं Jamaat-e-Islami को 70 सीटें मिलीं, जबकि अन्य दलों के खाते में 6 सीटें गईं। इस चुनाव में भंग हो चुकी Awami League की अनुपस्थिति के कारण मुकाबला मुख्य रूप से बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच रहा।

बोगुरा से जीते तारिक रहमान

बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के बेटे Tarique Rahman ने अपने गृह जिले बोगुरा से जीत दर्ज की। उन्हें 2,16,284 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात उम्मीदवार आबिदुर रहमान को 97,626 मत प्राप्त हुए। बीएनपी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि सत्ता में आने पर तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा।

अंतरिम सरकार का कार्यकाल समाप्त होने की तैयारी

अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार का नेतृत्व Muhammad Yunus कर रहे थे। बीएनपी की जीत के साथ ही 18 महीने से चल रहा अंतरिम शासन समाप्त होने की संभावना है और नई निर्वाचित सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।

प्रमुख नेताओं के चुनावी नतीजे

बीएनपी महासचिव Mirza Fakhrul Islam Alamgir ने ठाकुरगांव सीट से 2,34,144 वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंद्वी जमात उम्मीदवार डेलवर हुसैन को 1,37,281 मत मिले।
वहीं जमात अध्यक्ष Shafiqur Rahman ने ढाका की एक सीट से 82,645 वोटों के साथ जीत दर्ज की। दूसरी ओर, जमात महासचिव मिया गुलाम पोरवार दक्षिण-पश्चिमी खुलना सीट से बीएनपी प्रत्याशी अली असगर लॉबी से मामूली अंतर से चुनाव हार गए।

सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी संपन्न

संसदीय चुनाव के साथ ही “जुलाई राष्ट्रीय चार्टर” नामक 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया। शाम 4:30 बजे मतदान समाप्त होते ही मतगणना शुरू कर दी गई थी। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की, जो देश के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्था मानी जा रही है।

जमात की महत्वाकांक्षा और ऐतिहासिक संदर्भ

जमात-ए-इस्लामी, जिसने 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता का विरोध किया था, इस चुनाव में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कर रही थी। हालांकि, उपलब्ध रुझानों से संकेत मिलता है कि वह सरकार गठन की दौड़ में पीछे रह गई है।

अनौपचारिक नतीजों के अनुसार बीएनपी गठबंधन स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में है। यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में रहते हैं, तो तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं और देश में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी।

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