बांग्लादेश में चुनाव से पहले यूनुस सरकार में उथल-पुथल, एक और अहम सलाहकार का इस्तीफा
बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से पहले अंतरिम सरकार लगातार दबाव में नजर आ रही है। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली प्रशासनिक व्यवस्था में एक और बड़ा इस्तीफा सामने आया है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता और गहराती दिख रही है।
🟠 स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार ने छोड़ा पद
अंतरिम सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक प्रोफेसर डॉ. मो. सैयदुर रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही यह बदलाव आधिकारिक हो गया है।
🟠 मंत्री स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुके थे रहमान
डॉ. सैयदुर रहमान बांग्लादेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर रह चुके हैं। नवंबर 2024 में उन्हें मंत्री स्तर पर स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वे यूनुस प्रशासन के अहम चेहरों में गिने जाते थे।
🟠 इस्तीफे की वजह पर क्या बोले रहमान
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक प्रोथोम आलो से बातचीत में डॉ. रहमान ने बताया कि उन्होंने करीब एक महीने पहले इस्तीफा सौंप दिया था, जिसे अब स्वीकार किया गया है। उनके अनुसार, सरकारी सेवा में उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है।
🟠 गृह मंत्रालय से पहले भी आ चुका है इस्तीफा
इससे पहले गृह मंत्रालय के मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक खुदा बख्श चौधरी 24 दिसंबर को अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे ये इस्तीफे अंतरिम सरकार के भीतर बढ़ती बेचैनी और दबाव को दर्शाते हैं।
🟠 इंकलाब मंच के अल्टीमेटम से जुड़ा मामला
खुदा बख्श चौधरी का इस्तीफा उस समय सामने आया था, जब कट्टरपंथी संगठन इंकलाब मंच ने उन्हें और गृह मामलों के सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। यह अल्टीमेटम शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में प्रगति को लेकर जारी किया गया था।
🟠 छात्र नेताओं का भी सरकार से बाहर जाना
दिसंबर महीने में छात्र आंदोलन से जुड़े नेता माहफुज आलम और आसिफ महमूद भी चुनाव लड़ने की तैयारी के चलते अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इससे सरकार के भीतर बदलावों की रफ्तार और तेज हो गई है।
🟠 किन वजहों से बढ़ रही है अस्थिरता
विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये इस्तीफे कई कारणों से हो रहे हैं—
- चरमपंथी संगठनों का दबाव
- अंतरिम सरकार के भीतर मतभेद
- चुनावी तैयारियों को लेकर खींचतान
🟠 चुनाव निष्पक्ष कराने का बढ़ता दबाव
अंतरिम सरकार पर 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने का भारी दबाव है। वहीं, अवामी लीग पर प्रतिबंध, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे अब भी विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
🟠 चुनाव से पहले सरकार की बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे मुहम्मद यूनुस प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा बनते जा रहे हैं। यदि आंतरिक स्थिरता नहीं संभाली गई, तो इसका सीधा असर चुनावी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय भरोसे पर पड़ सकता है।