बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या — पीटकर और ज़हर देकर ली गई जान, अल्पसंख्यकों में भय बढ़ा…
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों का सिलसिला नहीं थम रहा है। सुनामगंज जिले में एक और हिंदू व्यक्ति जॉय महापात्रो की दर्दनाक मौत ने अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के मुताबिक, उन्हें बेरहमी से पीटने के बाद ज़हर पिलाया गया। लगातार बढ़ रहे ऐसे हमलों से बांग्लादेश की हिंदू आबादी बेहद डरी हुई है और देश के कानून-व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा है।
जॉय महापात्रो की हत्या: पीटा और ज़हर दिया
सुनामगंज जिले में जॉय महापात्रो पर अमानवीय तरीके से हमला किया गया।
परिवार के अनुसार, पहले उन्हें एक स्थानीय व्यक्ति ने बेरहमी से पीटा और फिर ज़हर पिला दिया।
गंभीर हालत में उन्हें सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां ICU में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हिंदू समुदाय में डर और दहशत का माहौल
जॉय महापात्रो की हत्या के बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय दहशत में है।
पिछले दो महीनों में लगातार हो रही घटनाओं ने भय का माहौल गहरा कर दिया है।
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की कमजोर कार्रवाई अपराधियों को बढ़ावा दे रही है।
नरसिंगदी में भी हिंदू व्यक्ति की हत्या — धारदार हथियार से वार
कुछ ही दिन पहले नरसिंगदी शहर में एक 40 वर्षीय हिंदू व्यक्ति की अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से हत्या कर दी।
अब तक आरोपी फरार हैं और जांच अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
पत्रकार और व्यापारी राणा प्रताप की गोली मारकर हत्या
5 जनवरी को जशोर के कोपलिया बाजार में हिंदू व्यापारी और पत्रकार राणा प्रताप को गोली मारकर हत्या कर दी गई।
यह घटना साबित करती है कि अपराधी न सिर्फ अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं।
ईशनिंदा का आरोप लगाकर दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या
18 दिसंबर को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप लगाकर पीट-पीटकर मार डाला।
इसके बाद उनके शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया — यह घटना पूरे बांग्लादेश में आक्रोश का कारण बनी।
लेकिन कार्रवाई न के बराबर हुई।
खोकन चंद्र दास की चाकू मारकर हत्या और जलाया गया शरीर
31 दिसंबर 2025 को शरियतपुर में व्यापारी खोकन चंद्र दास पर हमला हुआ।
उन्हें चाकू मारकर जलाया गया, और तीन दिन बाद ढाका अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले में भी गिरफ्तारी में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल — “प्रशासन अपराधियों को बढ़ावा दे रहा”
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि—
- पुलिस की ढीली कार्रवाई
- मुकदमों में देरी
- अपराधियों की गिरफ्तारी में सुस्ती
- कट्टरपंथियों को बचाया जाना
इन सब कारणों से अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा खतरे में है।
क्या बांग्लादेश सरकार नियंत्रण खो रही है?
वर्तमान घटनाएँ बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की हालत पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं, और इन पर कार्रवाई बेहद धीमी है।
विशेषज्ञों के अनुसार —
- कट्टरपंथियों को रोकने में प्रशासन नाकाम
- अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं
- अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप
यदि हालात यही रहे, तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का भविष्य और भी भयावह हो सकता है।