बांग्लादेश में चुनाव से पहले खूनी सियासत, अवामी लीग कार्यकर्ता की भीड़ ने चाकू मारकर हत्या ढाका में बढ़ती हिंसा ने खड़े किए लोकतंत्र पर सवाल
ढाका। बांग्लादेश में चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक हिंसा लगातार तेज होती जा रही है। बुधवार को राजधानी ढाका में अवामी लीग से जुड़े एक कार्यकर्ता की भीड़ द्वारा चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। अवामी लीग ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
भीड़ के हमले में गई रियाद हुसैन की जान
अवामी लीग के मीडिया सेल के मुताबिक, मृतक की पहचान रियाद हुसैन के रूप में हुई है, जो पार्टी की सहयोगी इकाई स्वेच्छासेवक लीग से जुड़े हुए थे। आरोप है कि बीएनपी-जमात से जुड़े लोग मोटरसाइकिलों पर सवार होकर मौके पर पहुंचे और बिना किसी बहस या उकसावे के रियाद पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
अवामी लीग का आरोप: डर और आतंक फैलाने की साजिश
पार्टी का दावा है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक हिंसा का हिस्सा है। अवामी लीग का कहना है कि इसका मकसद पार्टी कार्यकर्ताओं में भय पैदा करना और चुनाव से पहले ‘आतंक का माहौल’ बनाना है।
सोशल मीडिया पर अवामी लीग का तीखा हमला
इस घटना को लेकर अवामी लीग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा बयान जारी किया। पार्टी ने लिखा कि जब भी बीएनपी-जमात की भीड़ सड़कों पर उतरती है, तो उसका उद्देश्य लोकतांत्रिक राजनीति को कुचलना, आम लोगों को डराना और खून-खराबा करना होता है।
‘यह सिर्फ हत्या नहीं, खुला राजनीतिक संदेश है’
अवामी लीग का कहना है कि रियाद हुसैन की हत्या एक संकेत है कि बीएनपी-जमात से जुड़े कट्टरपंथी तत्व दोबारा संगठित हो रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि ये ताकतें लोकतंत्र के बजाय भीड़तंत्र को हथियार बनाकर सत्ता की राजनीति करना चाहती हैं।
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हालात बदतर होने का दावा
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से अवामी लीग लगातार दावा कर रही है कि उसके नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि जेलों में बंद नेताओं तक की सुरक्षा खतरे में है और पहले भी हिरासत में हत्याओं के आरोप लगाए जा चुके हैं।
यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप
पिछले महीने अवामी लीग ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि देश को जानबूझकर अराजकता और अनिश्चितता की ओर धकेला जा रहा है। पार्टी का दावा है कि सत्ता पर कब्जा जमाए रखने के लिए हिंसा और डर की रणनीति अपनाई जा रही है।
देश में अपराधों में तेजी, कानून-व्यवस्था पर सवाल
अवामी लीग के मुताबिक, मौजूदा हालात में हत्या, दुष्कर्म, चोरी, डकैती और लूटपाट की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो बांग्लादेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
राजनीतिक विश्लेषण: चुनाव से पहले अस्थिरता किसे फायदा पहुंचा रही है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा न सिर्फ आम जनता के लिए खतरा है, बल्कि यह अंतरिम सरकार की निष्पक्षता और प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल खड़े करती है। अगर हिंसा का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।