बांग्लादेश चुनाव: जमात-ए-इस्लामी ने उतारा हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में अल्पसंख्यक समुदायों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिल रही है। इस बार कुल 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 12 स्वतंत्र और 10 महिलाएं शामिल हैं।
🟢 22 पार्टियों ने उतारे 68 अल्पसंख्यक उम्मीदवार
कुल 22 राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में 68 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे हैं। सबसे अधिक उम्मीदवार बांग्लादेश कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने घोषित किए, कुल 17। यह दर्शाता है कि विभिन्न दल अल्पसंख्यक मतों को सशक्त बनाने के लिए मैदान में सक्रिय हैं।
🟢 BNP-Jamaat का बढ़ता प्रभाव
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग इस चुनाव से बाहर होने के कारण BNP और जमात-ए-इस्लामी की भूमिका मजबूत हो गई है। BNP ने 6 और जमात ने 1 अल्पसंख्यक उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
विपक्ष के नए समीकरणों ने चुनाव को अप्रत्याशित बना दिया है।
🟢 कृष्णा नंदी: जमात का पहला हिंदू उम्मीदवार
कृष्णा नंदी, एक हिंदू व्यवसायी, Khulna-1 सीट से जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार हैं। वे 2003 से पार्टी से जुड़े हुए हैं। जमात ने पहली बार किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट दिया, और यह कदम हिंदू बहुल क्षेत्र में उनकी रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है।
यह कदम जमात की छवि को व्यापक बनाने और अल्पसंख्यक समुदाय का समर्थन हासिल करने की कोशिश है।
🟢 गोबिंद चंद्र प्रमाणिक: स्वतंत्र उम्मीदवार
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक, बांग्लादेश नेशनल हिंदू महासंघ के महासचिव, Gopalganj-3 से स्वतंत्र उम्मीदवार हैं। पहले उनकी नामांकन पर्ची खारिज हुई थी, लेकिन अपील के बाद इसे बहाल किया गया।
स्वतंत्र उम्मीदवारों की भागीदारी से चुनाव में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और BNP-Jamaat को चुनौती मिल रही है।
🟢 अल्पसंख्यक समुदायों की अहम भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि इस चुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ी है। आवामी लीग के बाहर होने से नए राजनीतिक समीकरण बने हैं और विपक्षी दलों की रणनीति ने चुनाव को अप्रत्याशित बना दिया है।
अल्पसंख्यक मतदाता और उम्मीदवार चुनावी नतीजों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।