बांदा में बच्चों के शोषण का अंतरराष्ट्रीय रैकेट बेनकाब, कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
10 साल तक 33 मासूमों का शोषण, डार्क वेब के जरिए 47 देशों तक पहुंचा कंटेंट
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आया यह मामला मानवता को झकझोर देने वाला है। यहां एक दंपती ने करीब एक दशक तक बच्चों को बहला-फुसलाकर और डराकर उनका यौन शोषण किया। आरोप है कि इन घिनौने अपराधों के वीडियो बनाकर उन्हें डार्क वेब के माध्यम से विदेशों तक बेचा गया। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़ा कंटेंट कई देशों में फैलाया गया।
सरकारी विभाग से जुड़ा आरोपी, पत्नी निभा रही थी सक्रिय भूमिका
मुख्य आरोपी सिंचाई विभाग का पूर्व जूनियर इंजीनियर था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे अपराध में उसकी पत्नी भी बराबर की भागीदार थी। दोनों मिलकर बच्चों को अपने जाल में फंसाते और लंबे समय तक उनका शोषण करते रहे। आरोपियों का सामाजिक रूप से सम्मानजनक पद पर होना मामले को और भी गंभीर बनाता है।
लालच और डर से मासूमों को फंसाने का तरीका
जांच में सामने आया कि बच्चों को ऑनलाइन गेम खेलने, पैसे देने या छोटे-छोटे गिफ्ट्स का लालच दिया जाता था। कई मामलों में बच्चों को धमकाकर और ब्लैकमेल कर चुप रहने पर मजबूर किया गया। पीड़ितों को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ा गया कि वे लंबे समय तक किसी से कुछ कह नहीं पाए।
अंतरराष्ट्रीय इनपुट से खुला पूरा नेटवर्क
बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट की वैश्विक निगरानी के दौरान कुछ संदिग्ध डिजिटल गतिविधियां सामने आईं। यह सूचना Interpol के जरिए भारत की जांच एजेंसियों तक पहुंची। इसके बाद Central Bureau of Investigation ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। डिजिटल सबूतों और तकनीकी जांच के जरिए पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।
2020 में केस दर्ज, 74 गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध
CBI ने अक्टूबर 2020 में इस मामले में केस दर्ज किया और फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की। जांच के दौरान 74 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। डिजिटल सबूत, पीड़ितों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानकर कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
विशेष पॉक्सो कोर्ट ने इस जघन्य अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में रखते हुए आरोपी इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज की जड़ों को हिला देते हैं और इनके खिलाफ कड़ा संदेश जरूरी है।
पीड़ित बच्चों को मुआवजा देने का आदेश
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही आरोपियों के घर से बरामद नकदी को भी सभी पीड़ितों में समान रूप से बांटने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।