हिंसा की आग में जलता बलूचिस्तान: कभी हिंदू साम्राज्य, आज विद्रोह का गढ़
पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इन दिनों भीषण हिंसा और विद्रोह की चपेट में है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को अशांत कर दिया है। लेकिन जिस धरती पर आज बंदूकें गरज रही हैं, वही भूमि कभी हिंदू-बौद्ध सभ्यता, सांस्कृतिक समृद्धि और धार्मिक सहिष्णुता का बड़ा केंद्र रही है।
🔥 हिंसा के साए में बलूचिस्तान
हाल के दिनों में बलूचिस्तान के क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नोष्की और तुंप जैसे जिलों में चरमपंथी हमलों के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए।
सुरक्षा बलों के मुताबिक, बीते सप्ताह में 145 से अधिक BLA विद्रोही मारे गए, जिसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है।
स्थिति बिगड़ने पर इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, परिवहन ठप हुआ और आम जनजीवन लगभग ठहर गया।
🏛️ जब बलूचिस्तान था हिंदू-बौद्ध सभ्यता का केंद्र
आज भले ही बलूचिस्तान को इस्लामी संस्कृति से जोड़ा जाता हो, लेकिन इतिहास के पन्ने बताते हैं कि यह क्षेत्र कभी हिंदू, बौद्ध और पारसी (ज़ोराष्ट्रियन) सभ्यताओं का प्रमुख केंद्र था।
कई सदियों तक यहां हिंदू राजवंशों, क्षत्रपों और व्यापारिक समुदायों का प्रभाव रहा, जिससे यह इलाका सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध बना।
🕉️ हिंगलाज माता मंदिर: इतिहास का जीवित प्रमाण
बलूचिस्तान की प्राचीन विरासत का सबसे सशक्त प्रमाण है हिंगलाज माता मंदिर।
हिंगोल नेशनल पार्क की दुर्गम गुफाओं में स्थित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है। आज भी हर साल हजारों हिंदू श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि इस क्षेत्र में कभी हिंदू संस्कृति कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए थी।
📜 7वीं शताब्दी के बाद बदला धार्मिक स्वरूप
इतिहासकारों के अनुसार, 7वीं शताब्दी में अरब आक्रमणों के बाद बलूचिस्तान का सामाजिक और धार्मिक स्वरूप तेजी से बदलने लगा।
इस्लाम के प्रसार के साथ-साथ हिंदू और बौद्ध प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया। इसके बावजूद कई धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक परंपराएं समय की मार सहते हुए आज भी अस्तित्व में हैं।
🔱 हिंगलाज शक्तिपीठ: सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक
मान्यता है कि हिंगलाज माता वही स्थान है जहां देवी सती का ब्रह्मरंध्र गिरा था।
कठिन भौगोलिक स्थिति और पहाड़ी इलाका होने के कारण यह स्थल आक्रमणों और विनाश से काफी हद तक बचा रहा। यही वजह है कि यह मंदिर आज भी प्राचीन सभ्यता के सतत अस्तित्व का प्रतीक माना जाता है।
⚔️ इतिहास और वर्तमान के बीच फंसा बलूचिस्तान
जहां एक ओर बलूचिस्तान का अतीत बहु-धार्मिक, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सहिष्णु रहा है, वहीं आज यह प्रांत विद्रोह, हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का अखाड़ा बन चुका है।
शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ उठती बगावत की आवाजें और लगातार बढ़ती हिंसा इस बात का संकेत हैं कि यह इलाका अब भी अपने पहचान के संकट से जूझ रहा है।
📊 मिटता इतिहास, बढ़ती आग
हिंगलाज माता मंदिर जैसे स्थल यह याद दिलाते हैं कि बलूचिस्तान सिर्फ संघर्ष की भूमि नहीं, बल्कि एक महान सभ्यता की धरोहर भी है।
लेकिन मौजूदा हालात में इतिहास की यह विरासत हिंसा की आग में धुंधली पड़ती जा रही है—जहां कभी आस्था और संस्कृति फलती-फूलती थी, आज वहां बारूद और विद्रोह का शोर है।