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पूर्व विधायक बलजीत यादव को नहीं मिली राहत, ईडी गिरफ्तारी को कोर्ट ने माना वैध; 28 फरवरी तक न्यायिक हिरासत

जयपुर/बहरोड़। विधायक कोष में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व विधायक बलजीत यादव को विशेष ईडी अदालत से राहत नहीं मिली है। जयपुर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामलों की विशेष अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को वैध मानते हुए उन्हें 28 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

पूर्व विधायक की ओर से अदालत में एक प्रार्थना पत्र दायर कर गिरफ्तारी को अवैध बताया गया था। इसमें तर्क दिया गया कि खरीदे गए खेल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाया जा रहा है, जबकि सामान की खरीद हो चुकी है। ऐसे में पूरी खरीद राशि को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ना उचित नहीं है।

अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला

याचिका में यह भी कहा गया कि मूल प्रकरण में एसीबी द्वारा दर्ज मामले में हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है, इसलिए ईडी गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

इस पर ईडी की ओर से अधिवक्ता अजातशत्रु मीणा ने दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश एसीबी के मामले से संबंधित है। ईडी एक अलग जांच एजेंसी है और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराध की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है, इसलिए गिरफ्तारी वैध है।

3.72 करोड़ रुपए के कथित दुरुपयोग का मामला

मामला वर्ष 2021-22 का बताया जा रहा है। आरोप है कि बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट की खरीद के नाम पर विधायक कोष से करीब 3.72 करोड़ रुपए खर्च किए गए। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितता और दुरुपयोग हुआ।

इस संबंध में एसीबी ने पहले एफआईआर दर्ज की थी, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।

पहले भी हो चुकी है सर्च कार्रवाई

ईडी ने पिछले वर्ष 24 जनवरी को जयपुर, दौसा और बहरोड़ में बलजीत यादव से जुड़े करीब दस ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। जांच के बाद एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार किया।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और अगली सुनवाई तक पूर्व विधायक न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

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