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हाफ पैंट, स्मार्टफोन और शादी पर खाप का फरमान, बागपत पंचायत के फैसलों से मचा हड़कंप


पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में आयोजित एक बड़ी खाप पंचायत ने समाज में मर्यादा और संस्कार बनाए रखने के नाम पर कई सख्त फैसले लिए हैं। इन निर्णयों में न सिर्फ लड़कियों बल्कि लड़कों के पहनावे, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और शादियों के तौर-तरीकों तक पर नियम तय किए गए हैं, जो अब चर्चा का विषय बन गए हैं।


🏘️ बागपत में जुटी खाप पंचायत

बागपत जिले में हुई इस पंचायत में कई गांवों के खाप चौधरी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य सामाजिक अनुशासन, परंपराओं की रक्षा और बढ़ती आधुनिक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण बताया गया। पंचायत की अगुवाई देशखाप के चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने की।


👖 लड़कों के हाफ पैंट पर रोक

पंचायत का सबसे विवादित फैसला लड़कों के हाफ पैंट या बरमूडा पहनने पर रोक को लेकर रहा। खाप का मानना है कि लड़कों का इस तरह का पहनावा सामाजिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है। चौधरियों ने कहा कि इससे परिवार और समाज पर गलत प्रभाव पड़ता है।
अब युवकों को फुल पैंट या पारंपरिक कुर्ता-पजामा पहनने की सलाह दी गई है।


📱 18 साल से कम उम्र में स्मार्टफोन पर पाबंदी

पंचायत ने तय किया कि 18 वर्ष से कम उम्र के लड़कों को स्मार्टफोन नहीं दिया जाना चाहिए। खाप नेताओं का कहना है कि कम उम्र में मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों को भटका रहा है और इसका असर उनके व्यवहार व पढ़ाई पर पड़ रहा है।


💍 मैरिज होम में शादियों का विरोध

खाप पंचायत ने मैरिज होम में होने वाली शादियों पर भी आपत्ति जताई है। पंचायत का तर्क है कि घर और गांव में होने वाली पारंपरिक शादियों से रिश्तों में मजबूती आती है, जबकि मैरिज होम की शादियां औपचारिक होकर जल्दी टूट जाती हैं।


📲 व्हाट्सऐप कार्ड को माना जाएगा न्योता

शादियों में बढ़ते खर्च को रोकने के लिए पंचायत ने एक अहम फैसला लिया है। अब व्हाट्सऐप पर भेजे गए शादी के कार्ड को ही आधिकारिक निमंत्रण माना जाएगा। खाप का मानना है कि इससे फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी।


🌍 पूरे यूपी में लागू करने की तैयारी

देशखाप चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने साफ किया कि यह फैसले केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेंगे। इन्हें पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने के लिए अन्य खापों से बातचीत की जाएगी। पंचायत ने राजस्थान में लिए गए इसी तरह के सामाजिक फैसलों का भी समर्थन किया है।


🗣️ खाप चौधरी का बयान

चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने कहा,
“समाज की मर्यादा हमारे लिए सबसे ऊपर है। जब लड़के हाफ पैंट पहनकर गलियों में घूमते हैं, तो यह अच्छा नहीं लगता। हम चाहते हैं कि युवा फिर से अपने संस्कार और संस्कृति से जुड़ें।”


खाप पंचायत के ये फैसले एक बार फिर परंपरा और आधुनिकता के टकराव को उजागर करते हैं। समर्थक इन्हें सामाजिक अनुशासन की कोशिश बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल मानते हैं। आने वाले समय में इन फैसलों पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होना तय है।

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