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अयोध्या पॉक्सो केस में बड़ा मोड़: बुलडोज़र कार्रवाई झेल चुके मोईद ख़ान बरी, नौकर राजू ख़ान दोषीविशेष पॉक्सो अदालत का फैसला

अयोध्या के बहुचर्चित वर्ष 2024 नाबालिग़ बलात्कार मामले में बुधवार को विशेष पॉक्सो अदालत ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने मुख्य अभियुक्त बनाए गए मोईद ख़ान को आरोपों से बरी कर दिया, जबकि उनके घरेलू नौकर राजू ख़ान को दोषी ठहराया गया है।

गैंगस्टर एक्ट के कारण जेल में रहेंगे मोईद

हालांकि अदालत से बरी होने के बावजूद मोईद ख़ान फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत एक अन्य मामला लंबित है।

क्या था पूरा मामला

29 जुलाई 2024 को अयोध्या के भदरसा थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय नाबालिग़ लड़की द्वारा गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायत में मोईद ख़ान और उनके नौकर राजू ख़ान को आरोपी बनाया गया था। दोनों को अगले दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।

गर्भवती नाबालिग़ और अदालत के आदेश पर गर्भपात

मामला दर्ज होने के समय पीड़िता गर्भवती थी। अदालत के निर्देश पर 7 अगस्त 2024 को लखनऊ के क्वीन मेरी अस्पताल में नाबालिग़ का गर्भपात कराया गया था।

पीड़िता के आरोप

पीड़िता का आरोप था कि वह राजू ख़ान के साथ काम करती थी और उसी ने उसे मोईद ख़ान से मिलवाया। आरोप के मुताबिक दोनों ने मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो भी बनाया गया।

डीएनए रिपोर्ट से बदली केस की दिशा

अदालत में पेश डीएनए रिपोर्ट के अनुसार भ्रूण का डीएनए केवल राजू ख़ान से मेल खाता पाया गया, जबकि मोईद ख़ान से कोई मेल नहीं मिला। इसी आधार पर अदालत ने मोईद को दोषमुक्त कर दिया।

वीडियो और घटनास्थल को लेकर सवाल

अभियोजन पक्ष घटना का वीडियो पेश नहीं कर सका। साथ ही पुलिस जांच में घटनास्थल को लेकर भी विरोधाभास सामने आए। कभी बेकरी के अंदर तो कभी बाहर पेड़ के नीचे घटना होने का दावा किया गया, जिसे अदालत ने गंभीर खामी माना।

बचाव पक्ष का पक्ष

मोईद ख़ान के अधिवक्ता सईद ख़ान ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट और कमजोर जांच के चलते अदालत ने उनके मुवक्किल को ‘बाइज़्ज़त बरी’ किया है। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा।

राज्य सरकार की बुलडोज़र कार्रवाई

मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने मोईद ख़ान की बेकरी और शॉपिंग मॉल पर बुलडोज़र कार्रवाई की थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसे तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण को जायज़ ठहराया था।

राजनीतिक बयानबाज़ी भी आई थी सामने

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में मोईद ख़ान को समाजवादी पार्टी से जुड़ा बताया था और कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोपियों के डीएनए टेस्ट की मांग की थी।

हाई कोर्ट में जाएगी सरकार

विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मोईद ख़ान को बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

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