Asim Munir Gaza Crisis: गाजा भेजने के वादे में फंसे फील्ड मार्शल मुनीर, अमेरिका–सेना–जनता तीनों नाराज़
पाकिस्तान के सबसे ताकतवर व्यक्ति माने जाने वाले फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए गाजा अब सत्ता की सीढ़ी नहीं, बल्कि गले की हड्डी बनता जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान ने पाकिस्तान की राजनीति, सेना और जनता—तीनों को एक साथ भड़का दिया है। सवाल यह है कि क्या मुनीर ने पाकिस्तानी सेना को गाजा भेजने का वादा कर खुद को ऐसे जाल में फंसा लिया है, जहां से निकलना आसान नहीं?
🇺🇸 वह बयान जिसने भूचाल ला दिया
मार्को रुबियो के शब्द, पाकिस्तान में बवाल
शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान ने गाजा योजना का “हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया है या कम से कम उस पर विचार करने को कहा है।” यह बयान ट्रंप प्रशासन की उस योजना से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें गाजा में बहुराष्ट्रीय सैन्य तैनाती की बात कही जा रही है।
🔥 पाकिस्तान में एक सुर में विरोध
जनता से सेना तक, सबकी नजरें मुनीर पर
इस बयान के बाद पाकिस्तान की जनता, मीडिया, विपक्षी दल, यहां तक कि सेना के भीतर भी नाराज़गी खुलकर सामने आ गई। हर सवाल का केंद्र एक ही नाम बन गया—असीम मुनीर।
🏛️ सरकार की बैकफुट पर सफाई
विदेश कार्यालय ने किया डैमेज कंट्रोल
मामला बढ़ता देख पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि न तो पाकिस्तान से औपचारिक रूप से सेना भेजने को कहा गया है और न ही कोई फैसला हुआ है। इससे पहले विदेश मंत्री इशाक डार ने भी स्पष्ट किया था कि जब तक किसी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल (ISF) का दायरा तय नहीं होता, पाकिस्तान कोई निर्णय नहीं ले सकता।
⚔️ हमास पर लड़ाई से दूरी
“हमास को निरस्त्र करना हमारा काम नहीं”
इशाक डार ने साफ कहा कि हमास को हथियार डालने के लिए मजबूर करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी नहीं है। यही बयान पाकिस्तान के पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक रुख की याद दिलाता है।
📰 पाकिस्तानी मीडिया की खुली चेतावनी
डॉन का संपादकीय और सख्त संदेश
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ ने अपने संपादकीय में लिखा कि अमेरिका वह काम मुस्लिम देशों से करवाना चाहता है, जो इजरायल खुद नहीं कर पाया। अखबार ने चेतावनी दी कि किसी भी मुस्लिम देश को फिलिस्तीनी प्रतिरोध समूहों से लड़ने के लिए सेना नहीं भेजनी चाहिए।
🌍 क्यों दूसरे मुस्लिम देश पीछे हटे?
अरब देशों ने भी किया इनकार
रिपोर्ट्स के मुताबिक अजरबैजान, जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देशों ने गाजा में सेना भेजने से इनकार कर दिया है। उनका मानना है कि यह कदम अमेरिकी-इजरायली योजना को वैधता देगा।
📜 पाकिस्तान का पुराना उदाहरण
यमन युद्ध से दूरी, सही फैसला साबित हुआ
डॉन ने याद दिलाया कि कैसे सऊदी दबाव के बावजूद पाकिस्तान ने यमन युद्ध में सेना भेजने से इनकार किया था। समय ने साबित किया कि वह फैसला सही था। अब गाजा के मामले में भी वही समझदारी दिखाने की सलाह दी जा रही है।
⚠️ मुनीर के सामने दोहरी मुश्किल
ना अमेरिका नाराज़ हो, ना देश भड़के
असीम मुनीर की असली परेशानी यहीं से शुरू होती है। सत्ता मजबूत करने के लिए उन्होंने अमेरिका से जरूरत से ज्यादा नजदीकी बढ़ा ली। चीन पहले ही उनसे असहज है। अगर वह सेना नहीं भेजते, तो ट्रंप प्रशासन नाराज़ हो सकता है।
🪖 सेना के भीतर भी असंतोष
जनरल्स को सत्ता का रास्ता बंद
पाकिस्तानी सेना के कई वरिष्ठ जनरल पहले से ही मुनीर से नाराज़ बताए जाते हैं। वजह—उनके रहते किसी और का “सबसे ताकतवर” बन पाना लगभग नामुमकिन है।
🔥 अगर सेना भेजी तो क्या होगा?
विद्रोह और वैचारिक संकट
अगर मुनीर गाजा में सेना भेजने का फैसला करते हैं, तो सेना के भीतर विद्रोह की आशंका बढ़ जाएगी। जनता का गुस्सा तो है ही, साथ ही उनका कट्टरपंथी और इस्लामी छवि वाला चेहरा भी सवालों के घेरे में आ जाएगा।
गाजा बना मुनीर की सत्ता की परीक्षा
असीम मुनीर आज ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां हर रास्ता नुकसान का है। एक तरफ अमेरिका की अपेक्षाएं हैं, दूसरी तरफ सेना और जनता का गुस्सा। गाजा संकट अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि मुनीर के राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।