हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित आवाज़: अरिजीत सिंह का पार्श्वगायन से हटने का फैसला38 वर्ष की उम्र में बड़ा निर्णय
हिंदी फिल्म संगीत के शीर्ष गायक अरिजीत सिंह ने पार्श्वगायन से संन्यास लेने का संकेत देकर संगीत जगत को चौंका दिया है। महज 38 वर्ष की उम्र में, जब अधिकांश कलाकार अपने करियर के स्वर्णिम दौर में होते हैं, उस समय लिया गया यह फैसला सहज नहीं कहा जा सकता। हालांकि अरिजीत जैसे कलाकार के लिए, जिन्होंने अपनी शर्तों पर सफलता हासिल की हो, ऐसे निर्णय को अस्वाभाविक भी नहीं माना जा रहा।
इंडस्ट्री से टकराव और आत्मसम्मान की मिसाल
अरिजीत सिंह ने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे समझौते के रास्ते पर नहीं चलेंगे। वर्ष 2016 में, जब वे अपेक्षाकृत युवा थे, तब फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े सितारे से सार्वजनिक मतभेद के बावजूद उन्होंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। इसके परिणाम भी उन्हें भुगतने पड़े, लेकिन उनकी आवाज़ की लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई।
संगीत की जड़ें बचपन से जुड़ी
अरिजीत सिंह का संगीत से रिश्ता बचपन से ही रहा है। उनकी मां शास्त्रीय संगीत से जुड़ी थीं, और इसी माहौल में उनका पालन-पोषण हुआ। यह कहना गलत नहीं होगा कि संगीत उनकी जीवनशैली का हिस्सा रहा है। वर्ष 2011 में फिल्म मर्डर 2 के गीतों से उन्हें जो पहचान मिली, उसने उन्हें रातों-रात हर संगीतकार की पहली पसंद बना दिया।
हर फिल्म में अरिजीत की आवाज़ की गूंज
पिछले डेढ़ दशक में अरिजीत सिंह ने फिल्म की सफलता से अलग अपनी पहचान बनाई। फिल्म याद रहे या न रहे, लेकिन उनके गाने श्रोताओं की ज़ुबान पर चढ़ गए। “राब्ता”, “मैं रंग शरबतों का”, “गेरुआ” जैसे गीतों ने उन्हें हर पीढ़ी का पसंदीदा गायक बना दिया।
आंकड़ों में अरिजीत की उपलब्धियां
करीब 15 वर्षों के करियर में अरिजीत सिंह ने विभिन्न भाषाओं में 700 से अधिक गीत गाए। उन्हें अब तक 2 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 8 फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें देश-विदेश में अपार लोकप्रियता और सम्मान प्राप्त हुआ है।
संन्यास नहीं, संगीत से नया रिश्ता
अरिजीत सिंह ने यह स्पष्ट किया है कि वे संगीत से दूर नहीं जा रहे हैं। उनके अनुसार, वे अब खुद को एक प्रशंसक और सीखने वाले कलाकार के रूप में देखते हैं। भविष्य में वे बिना किसी दबाव के, एक सामान्य कलाकार की तरह संगीत से जुड़ना चाहते हैं।
शीर्ष पर रहते हुए विदा लेने की परंपरा
फिल्म इंडस्ट्री में शीर्ष पर रहते हुए पीछे हटने के उदाहरण कम हैं, लेकिन नए नहीं। हाल ही में अभिनेता विक्रांत मैसी ने राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद अभिनय से ब्रेक लेने की घोषणा की थी। इससे पहले 70 के दशक में विनोद खन्ना ने भी लोकप्रियता के शिखर पर फिल्मी दुनिया छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग चुना था।
प्रशंसकों के लिए गर्व का क्षण
अरिजीत सिंह का यह फैसला उनके प्रशंसकों के लिए भावुक करने वाला जरूर है, लेकिन गर्व का विषय भी है। उन्होंने न सिर्फ एक बेहतरीन गायक को सराहा,