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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गरमाया अरावली विवाद, गहलोत ने शुरू किया ‘Save Aravalli’ अभियान….

अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासत और पर्यावरण दोनों मोर्चों पर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में अरावली पहाड़ियों को लेकर दी गई नई व्याख्या के बाद पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ‘Save Aravalli’ अभियान शुरू कर दिया है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि केवल वही क्षेत्र अरावली पर्वतमाला के अंतर्गत माने जाएंगे, जिनकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक है। इस नई परिभाषा के लागू होने से अरावली क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकता है।

गहलोत ने जताई गंभीर चिंता

अशोक गहलोत ने इस फैसले को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे अवैध और अनियंत्रित खनन को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए ‘Save Aravalli’ अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि उत्तर भारत की जीवनरेखा है।

पर्यावरण पर पड़ सकता है असर

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला भूजल संरक्षण, जलवायु संतुलन और मरुस्थलीकरण को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। यदि इसके बड़े हिस्से से कानूनी सुरक्षा हटती है, तो इससे जल संकट, धूल भरी आंधियों और जैव विविधता के नुकसान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

जन आंदोलनों ने पकड़ी रफ्तार

फैसले के बाद कई सामाजिक और पर्यावरण संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराया है। ‘अरावली बचाओ’ जैसे अभियानों के जरिए सरकार और न्यायपालिका से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है।

आगे क्या?

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट इस बढ़ते विरोध को देखते हुए कोई संशोधन या स्पष्टीकरण जारी करते हैं या नहीं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा पर्यावरणीय और राजनीतिक विषय बन सकता है।

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