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अरावली संरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक: राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज, पर्यावरणविदों ने फैसले का किया स्वागत

अलवर। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और संरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 20 नवंबर के आदेश पर रोक लगाने के बाद प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग–अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पर पूर्व भाजपा विधायक रामहेत सिंह यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देश भी अरावली संरक्षण के पक्ष में रहे हैं, और अदालत के ताज़ा आदेश का भी स्वागत किया जाना चाहिए।

यादव ने पूर्व गहलोत सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में अवैध खनन में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई, जबकि भाजपा सरकार हमेशा अरावली संरक्षण के प्रति संवेदनशील रही है। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।

वहीं पर्यावरणविद् राजेश कृष्ण सिद्ध ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को अरावली संरक्षण के लिए सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना है कि केंद्र सरकार जल्दबाज़ी में अरावली की पहाड़ियों से जुड़े फैसले माफिया हितों को ध्यान में रखकर लेने जा रही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सही समय पर दखल दिया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एक हाई पावरड एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का भी प्रस्ताव रखा है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।

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अरावली संरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक: राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज, पर्यावरणविदों ने फैसले का किया स्वागत

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