अरावली बचाओ जनचेतना मार्च: कांग्रेस नेताओं ने खनन नीति पर जताई कड़ी आपत्ति, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
अलवर में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से शुक्रवार को ‘अरावली बचाओ जनचेतना पैदल मार्च’ का आयोजन किया गया। कटी घाटी से मिनी सचिवालय तक निकाले गए इस मार्च में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, वैभव गहलोत सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
कटी घाटी के समीप नगर वन की पहाड़ियों पर चढ़कर नेताओं ने अरावली संरक्षण का संदेश भी दिया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली का बचना भावी पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है। यदि पर्वतमाला नष्ट हुई तो पर्यावरण, पानी और जलवायु पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अरावली की परिभाषा बदलकर 90% क्षेत्र में खनन की अनुमति देने की तैयारी की जा रही है, जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। जूली ने कहा कि कांग्रेस अरावली बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अरावली को “जीवन रेखा” बताते हुए कहा कि यह जलवायु नियंत्रण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद जल्दबाजी में खान लीज टेंडर जारी कर खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 100 मीटर परिभाषा से अरावली को नुकसान होगा। उन्होंने मांग की कि इस शर्त को हटाकर अरावली श्रृंखला को संपूर्ण रूप से संरक्षित घोषित किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत ने कहा कि अरावली संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि राजस्थान अरावली का सबसे बड़ा भूभाग है, इसलिए इसे बचाना सबकी जिम्मेदारी है।
मार्च में अलवर, बहरोड़, तिजारा, कोटपुतली और खैरथल सहित विभिन्न क्षेत्रों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं व सामाजिक संगठनों ने भागीदारी दर्ज कराई।