सामाजिक संदेश की मिसाल दहेज के खिलाफ एक रुपया बना सबसे बड़ा उपहार
राजस्थान के नीमराणा उपखंड क्षेत्र से एक ऐसी शादी की खबर सामने आई है, जिसने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा पर गहरा प्रहार किया है। जहां आज भी विवाह को लेन-देन से जोड़ा जाता है, वहीं एक शिक्षित परिवार ने 11 लाख रुपये ठुकराकर यह साबित कर दिया कि संस्कार और सोच किसी भी धनराशि से कहीं अधिक मूल्यवान होते हैं।
दहेज विरोध की अनूठी मिसाल
वर पक्ष ने 11 लाख लौटाकर निभाई एक रुपए में रस्म
शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के गांव गूगलकोटा में गुरुवार रात्रि को आयोजित विवाह समारोह में दहेज विरोध का प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। अजमेर जिले की अराई तहसील स्थित मंडावरिया गांव से आई बारात में लग्न-गौरवा रस्म के दौरान दुल्हन पक्ष ने परंपरा अनुसार 11 लाख रुपये नकद देने की पेशकश की, लेकिन वर पक्ष ने इसे लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
शिक्षक दूल्हे और प्रधानाचार्य पिता की सशक्त सोच
दहेज को बताया सामाजिक अभिशाप, एक रुपया और नारियल किया स्वीकार
दूल्हा करण सिंह राठौड़, जो विशेष बीएड कर मूक-बधिर विद्यालय निवाई (टोंक) में शिक्षक हैं, और उनके पिता संजय सिंह राठौड़ ने दहेज को सामाजिक कुरीति बताते हुए 11 लाख रुपये लौटाए। रस्म के प्रतीक स्वरूप केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार कर उन्होंने समाज को स्पष्ट संदेश दिया कि विवाह संबंध सम्मान और समझ पर आधारित होने चाहिए, न कि पैसों पर।
दुल्हन की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा
बचपन में मां को खोया, ननिहाल में रहकर पाई उच्च शिक्षा
दुल्हन रेणुका कंवर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में मां के निधन के बाद उन्होंने गूगलकोटा स्थित ननिहाल में रहकर पढ़ाई की। उन्होंने बीकॉम और बीएड की शिक्षा पूरी की है। मूल रूप से कोटपूतली क्षेत्र के बागावास अहीर गांव की रहने वाली रेणुका की शिक्षा और आत्मनिर्भरता इस विवाह को और भी प्रेरक बनाती है।
समाज के लिए सकारात्मक संदेश ,ग्रामीणों ने की खुले मंच से सराहना
लग्न टीका रस्म के दौरान जब वर पक्ष ने 11 लाख रुपये लौटाए, तो वहां मौजूद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने तालियों के साथ इस फैसले का स्वागत किया। कुतीना सरपंच रविंद्र सिंह चौहान, गूगलकोटा सरपंच श्यामसुंदर यादव सहित कई गणमान्य लोगों ने इसे समाज के लिए आदर्श बताया।
शिक्षित परिवार की सोच बनी चर्चा का विषय
प्राइवेट कॉलेज के प्राचार्य हैं दूल्हे के पिता
दूल्हे के पिता संजय सिंह राठौड़ अजमेर के एक निजी कॉलेज में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। वहीं, दुल्हन के पिता विनोद सिंह व्यवसायी हैं, जिन्होंने भी वर पक्ष के इस निर्णय को सम्मान के साथ स्वीकार किया।
यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया है। आज जब दहेज के कारण रिश्ते टूट जाते हैं और बेटियां बोझ समझी जाती हैं, ऐसे में 11 लाख रुपये लौटाना एक साहसिक और अनुकरणीय कदम है। यह घटना साबित करती है कि बदलाव की शुरुआत घर से होती है और शिक्षित सोच समाज को नई दिशा दे सकती है।
एक रुपया, लेकिन संदेश करोड़ों का
गूगलकोटा की यह शादी दहेज विरोधी आंदोलन को नई ऊर्जा देती है। यह उदाहरण आने वाली पीढ़ियों को सिखाता है कि सच्चा सम्मान और रिश्तों की मजबूती किसी भी धनराशि से कहीं ऊपर होती है।