अलवर की सिलीसेढ़ झील को मिला अंतरराष्ट्रीय दर्जा, बनी रामसर साइट…
अलवर की प्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय महत्व प्राप्त हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के रामसर कन्वेंशन के तहत झील को रामसर साइट का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही राजस्थान की रामसर साइट्स की संख्या 5 और भारत की कुल रामसर साइट्स 95 हो गई हैं। इसी सूची में कोपरा जलाशय (छत्तीसगढ़) को भी नया रामसर स्थल घोषित किया गया है।
जैव विविधता का प्रमुख केंद्र
सिलीसेढ़ झील लंबे समय से जैव विविधता का अहम केंद्र रही है। झील और उसके आसपास के नमीयुक्त भू-भाग में हर वर्ष 150 से अधिक विदेशी पक्षी प्रजातियां प्रजनन और प्रवास के लिए आती हैं।
यहां साइबेरिया, अफगानिस्तान, मंगोलिया सहित कई देशों से पक्षियों का आगमन होता है। हर साल लगभग 20 हजार पक्षी इस क्षेत्र में देखे जाते हैं, जो रामसर मानकों को पूरा करता है।
रामसर दर्जे के मानक
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सिलीसेढ़ क्षेत्र में—
- मछलियों की समृद्ध विविधता
- जलीय जीवों की पर्याप्त उपस्थिति
- सुरक्षित और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र
- पक्षियों की संख्या किसी एक प्रजाति की वैश्विक आबादी का कम से कम 1 प्रतिशत
जैसे सभी आवश्यक मानक पूरे पाए गए।
संरक्षण और विकास को मिलेगा बढ़ावा
रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद सिलीसेढ़ झील का संरक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाएगा। इससे—
- झील क्षेत्र का वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित होगा
- अवैध कब्जे हटाए जाएंगे
- अंतरराष्ट्रीय और बड़े गैर-सरकारी संगठनों से आर्थिक सहायता मिल सकेगी
- होम-स्टे, इको-टूरिज्म और अन्य पर्यटन इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा
- स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे
ऐसे मिला रामसर दर्जा
इस दर्जे के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा। वहां से यह प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को भेजा गया। सभी मापदंडों की जांच के बाद यूएन ने सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट के रूप में मान्यता दी।
सिलीसेढ़ झील को मिला यह दर्जा न सिर्फ अलवर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व का विषय है और आने वाले समय में यह क्षेत्र इको-टूरिज्म और जैव संरक्षण का मॉडल बन सकता है।