अलवर जिले को जल संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 25 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कारजल प्रबंधन में अलवर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमका, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित…
अलवर जिले ने जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देशभर में अपनी पहचान बनाई है। जिले को ‘जल संचय जन भागीदारी’ (जेएसजेबी) पहल के तहत उत्कृष्ट कार्य के लिए तृतीय श्रेणी में चुना गया है। इसके तहत अलवर को 25 लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 18 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रदान करेंगी।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2025 में राजस्थान का शानदार प्रदर्शन
तीन जिलों ने बनाई शीर्ष स्थानों में जगह, अलवर भी रहा शामिल
राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2025 के तहत राजस्थान को देश के तीन सर्वश्रेष्ठ राज्यों में स्थान मिला है। प्रथम श्रेणी में भीलवाड़ा और बाड़मेर को 2-2 करोड़ रुपये, द्वितीय श्रेणी में जयपुर और उदयपुर को 1-1 करोड़ रुपये, जबकि तृतीय श्रेणी में अलवर, डूंगरपुर, बारां, चित्तौड़गढ़ और सीकर को 25-25 लाख रुपये से सम्मानित किया जाएगा।
जल संचयन जन भागीदारी: सामुदायिक शक्ति से जल संरक्षण का मॉडल
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन को मिला नया आयाम
‘कैच द रेन’ अभियान के तहत चल रही जल संचय जन भागीदारी पहल जल शक्ति मंत्रालय की एक प्रमुख सामुदायिक योजना है। इसमें स्थानीय नागरिकों, पंचायतों और प्रशासन की भागीदारी से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाया गया है। भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन से लेकर झीलों, तालाबों और बावड़ियों के पुनरुद्धार तक कार्य किए जा रहे हैं।
देशभर में बनेगी 10 हजार नई जल संरचनाएं
सतत जल प्रबंधन की दिशा में ऐतिहासिक कदम
इस योजना के तहत राज्यों को पांच क्षेत्रों में बांटकर कम से कम 10,000 कृत्रिम जल पुनर्भरण और भंडारण संरचनाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह लक्ष्य 3,000 तय किया गया है, जबकि शहरी निकायों को 2,000 संरचनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
100 विजेताओं को मिलेगा प्रथम जेएसजेबी सम्मान
राज्य, जिले, नगर निगम, उद्योग और स्वयंसेवी संस्थाएं शामिल
इस वर्ष ‘प्रथम जल संचय जन भागीदारी’ सम्मान के तहत कुल 100 पुरस्कार घोषित किए गए हैं। इनमें 3 राज्य, 67 जिले, 6 नगर निगम, 2 उद्योग, 3 एनजीओ और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं। विजेताओं का चयन जेएसजेबी पोर्टल पर अपलोड किए गए सत्यापित आंकड़ों के आधार पर किया गया।
अलवर का यह सम्मान केवल जिला प्रशासन की उपलब्धि नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामुदायिक प्रयासों का परिणाम है। यह पहल दिखाती है कि जब जनता और सरकार मिलकर काम करती है, तो जल संकट जैसी गंभीर समस्या का समाधान भी संभव है। अलवर अब देशभर के लिए एक प्रेरक मॉडल बन गया है।