अलवर में गंदे नाले के दूषित पानी का कारोबार , वार्ड 61 से नाले का गंदा पानी मोटर से खींचकर 3 KM दूर खेतों तक सप्लाई, सिस्टम की मिलीभगत से सालों से चल रहा खेल…
अलवर शहर के वार्ड नंबर 61 में रेलवे लाइन के पास खुले गंदे नाले से मोटर लगाकर पानी खींचे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह कोई एक-दो दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि सालों से चल रहा संगठित अवैध कारोबार बताया जा रहा है, जिसमें लोगों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब वार्ड पार्षद सतीश यादव को देर रात नलों से गंदा पानी आने की शिकायत मिली। जांच करने पर सामने आया कि उस वक्त जलदाय विभाग की कोई सप्लाई चालू ही नहीं थी। विभागीय कर्मचारियों को मौके पर बुलाया गया तो साफ हो गया कि नलों में आ रहा पानी सीधे गंदे नाले से आ रहा है।
जब नाले के पास जाकर जांच की गई तो हालात और भी चौंकाने वाले थे। नाले के अंदर मोटर लगी हुई थी, जो अवैध बिजली कनेक्शन से चलाई जा रही थी। इससे जुड़ी पाइपलाइन जमीन के नीचे-नीचे बिछी हुई थी, जो करीब तीन किलोमीटर दूर चांदुकी गांव के खेतों तक जाती है। इसी जहरीले पानी से खेतों की सिंचाई की जा रही है और पानी बेचे जाने की भी पुख्ता चर्चाएं हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतनी लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन कैसे डाली गई?
रेलवे लाइन कैसे क्रॉस की गई?
नगर निगम, जलदाय विभाग, बिजली विभाग और रेलवे प्रशासन को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी?
या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मोटर कोई नई नहीं है, बल्कि कई वर्षों से लगातार चल रही है, जिससे साफ है कि यह मामला महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा खेल है।
गंदे नाले के पानी से की जा रही खेती सीधे तौर पर शहर और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर बम की तरह है। ऐसे में सवाल सिर्फ अवैध मोटर का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है।
बाइट – सतीश यादव, पार्षद:
“नाले में मोटर लगाकर गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, यह बेहद गंभीर मामला है। यह कब से चल रहा है, किसके संरक्षण में चल रहा है, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।”
अब देखना यह है कि नगर निगम, जलदाय विभाग, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग , रेलवे और जिला प्रशासन इस ज़हर के कारोबार पर कब और कैसी कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबाकर भुला दिया जाएगा।