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“वोट लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप… युवा कांग्रेस का बड़ा हमला! भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर घिरी विपक्षी राजनीति”

राजस्थान में मतदाता सूची को लेकर सियासत फिर गर्मा गई है। वोट चोरी और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर युवा कांग्रेस ने आज केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। विरोध के矍 बीच चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आइए पूरा मामला समझते हैं…

“मतदाता सूची में धांधली का दावा—युवा कांग्रेस का सीधा हमला”

युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में छेड़छाड़ की गई है। कई क्षेत्रों में एक ही पते पर सैकड़ों नाम जुड़ने, असामान्य बदलाव और संदिग्ध वोटरों के शामिल होने जैसे मामले सामने आए हैं। संगठन का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खुली छेड़छाड़ है।

“केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप—‘लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश’”

युवा कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रशासन और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से मताधिकार को कमजोर किया जा रहा है। इस मुद्दे पर सड़क से सोशल मीडिया तक कांग्रेस आक्रामक मोड में दिखी।

“चुनाव आयोग पर निष्पक्षता की कसौटी—कांग्रेस ने उठाए सवाल”

प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आयोग से तत्काल जांच, सूची का पुनः सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

“सड़कों पर उतरी युवा कांग्रेस—नारेबाजी और पोस्टर की गूंज”

जयपुर और अन्य जिलों में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता काले झंडे, प्लेकार्ड और ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नारों के साथ सड़कों पर उतरे। पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आम मतदाता के अधिकारों की लड़ाई है।

क्या वास्तव में मतदाता सूची पर मंडरा रहा है खतरा?”

मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोप पहले भी कई राज्यों में उठते रहे हैं, लेकिन राजस्थान में इसे चुनावी माहौल बदलने से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि आरोप सही हैं तो यह लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाला मामला होगा। दूसरी ओर, भाजपा और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।
चुनाव आयोग की पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ही स्थिति को स्पष्ट कर सकेगी।

“मतदाता सूची विवाद पर बढ़ी सियासी गरमी

यह मुद्दा अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। आने वाले दिनों में आयोग की प्रतिक्रिया, सरकार का रुख और कांग्रेस का आंदोलन—राजस्थान की राजनीति को नया मोड़ दे सकते हैं।

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