महाराष्ट्र की सियासत का काला अध्याय: अजित पवार की मौत पर उठे सवाल, संजय राउत के बयान से सियासी भूचाल विमान हादसे की खबर से देश में मचा हड़कंप
28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़े झटके के रूप में सामने आई। अचानक एक विमान हादसे की खबर सामने आई, जिसमें बताया गया कि उस विमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सवार थे। शुरुआती घंटों में सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर उनके सुरक्षित होने की उम्मीदें जताई जाती रहीं, लेकिन करीब दो घंटे बाद यह पुष्टि कर दी गई कि अजित पवार का निधन हो चुका है। इस खबर के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
शोक के बीच तेज़ हुई सियासी गतिविधियां
अजित पवार के निधन के बाद जहां एक ओर उनके समर्थकों और राजनीतिक जगत में शोक का माहौल था, वहीं दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में हलचल तेज़ हो गई। महज 80 घंटे के भीतर उनकी पत्नी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी गई। इस तेज़ राजनीतिक घटनाक्रम ने कई सवालों को जन्म दिया और विपक्ष ने इसे असामान्य करार दिया।
संजय राउत का बड़ा बयान, बीजेपी पर सीधे आरोप
2 फरवरी 2026 को शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में अजित पवार की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य के वरिष्ठ नेता की विमान हादसे में मौत और उसके बाद सामने आ रहे तथ्यों पर जांच होना जरूरी है। राउत का दावा था कि अजित पवार की पार्टी के कुछ नेता भी इस मौत को संदिग्ध मान रहे हैं।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि अजित पवार ने ‘घर वापसी’ यानी एनसीपी में दोबारा लौटने की इच्छा जताई थी। इसके बाद बीजेपी की ओर से उन्हें सिंचन घोटाले से जुड़ी फाइलों को लेकर दबाव और धमकियां दी गईं। राउत के अनुसार, अजित पवार ने इन आरोपों का सार्वजनिक रूप से जवाब भी दिया था, लेकिन इसके महज 10 दिन बाद उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना जस्टिस लोया मामले से की।
क्या है सिंचन घोटाला मामला
महाराष्ट्र का सिंचन घोटाला राज्य की सिंचाई परियोजनाओं में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा रहा है। आरोपों के मुताबिक डैम, नहर और बैराज जैसी परियोजनाओं की लागत बिना ठोस कारण कई गुना बढ़ाई गई। ठेके देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और कई जगहों पर काम अधूरा या बेहद घटिया गुणवत्ता का पाया गया। इन गड़बड़ियों से राज्य को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी।
एनसीपी के संभावित विलय की चर्चाओं पर विराम
अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज़ हो गई थी कि शरद पवार की एनसीपी और अजित पवार गुट के बीच विलय की तैयारी चल रही थी। यूबीटी गुट की ओर से दावा किया गया कि इसके लिए 12 फरवरी 2026 की तारीख भी तय हो चुकी थी। हालांकि, महायुति के नेताओं ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें महज राजनीतिक अटकलें बताया।
जांच की मांग से गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति
संजय राउत के बयान के बाद एक बार फिर अजित पवार की मौत को लेकर जांच की मांग तेज़ हो गई है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़ा मोड़ ले सकता है।