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“हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा” — देश की सुरक्षा पर NSA अजीत डोवल के सख्त तेवर

विकसित भारत युवा नेता संवाद के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल ने देश की सुरक्षा, इतिहास और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति पर बेहद प्रभावशाली और कटाक्षपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने भारत के अतीत से जुड़े दर्दनाक अध्यायों का ज़िक्र करते हुए युवाओं से जागरूक और सक्रिय रहने की अपील की। डोवल ने चेताया कि इतिहास सबक देता है, और यदि आने वाली पीढ़ियां उसे भूल जाएंगी, तो यह भारत की सबसे बड़ी त्रासदी होगी।


भारत के अतीत पर डोवल के तीखे शब्द — “हम असहाय थे, अपमान सहते रहे”

NSA डोवल ने कहा कि देश का इतिहास संघर्ष और बलिदानों से भरा हुआ है।
उन्होंने बताया कि:

  • भारत ने सदियों तक अपमान और असहायता का सामना किया
  • कई वीरों को फांसी दी गई
  • गांव जलाए गए
  • मंदिरों को लूटा गया
  • सभ्यता को मिटाने की कोशिश हुई

डोवल के अनुसार, उस समय भारत केवल देखता रहा और प्रतिक्रिया देने की स्थिति में नहीं था। यह असहायता आज के स्वतंत्र और सक्षम भारत को बार-बार अपने इतिहास की याद दिलाती है।


“हर युवा में बदलाव की आग होनी चाहिए” — NSA का संदेश

NSA डोवल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि:

“प्रतिशोध शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन प्रतिशोध एक शक्तिशाली ऊर्जा है। हमें अपनी इतिहास का बदला लेना होगा — विकास, शक्ति और आत्मनिर्भरता के जरिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को फिर से उसी मुकाम पर पहुंचना होगा जहां वह अपने अधिकारों, विचारों और मान्यताओं के साथ विश्व का नेतृत्व करता था।


“सबक सीखें, वरना त्रासदी होगी” — सभ्यता और सुरक्षा पर चेतावनी

डोवल ने भारतीय सभ्यता की उदारता पर प्रकाश डालते हुए कहा:

  • भारत ने कभी किसी धर्मस्थल को नहीं तोड़ा
  • हम अन्य देशों को लूटने नहीं गए
  • हमारी संस्कृति शांति और सम्मान की प्रतीक रही

लेकिन उन्होंने जोड़ा कि भारत अपनी सुरक्षा और खतरों की पहचान करने में कई बार असफल रहा।
इस उदासीनता का खामियाज़ा देश को झेलना पड़ा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि:

“अगर आने वाली पीढ़ियां इस सबक को भूल जाती हैं, तो यह भारत के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।”


युद्ध क्यों लड़ने पड़ते हैं? — NSA डोवल ने समझाया वास्तविक उद्देश्य

NSA डोवल ने कहा कि युद्ध का उद्देश्य खून-खराबा नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति का परीक्षण होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया:

  • युद्ध इसलिए लड़े जाते हैं ताकि दुश्मन का मनोबल टूटे
  • दुश्मन हमारी शर्तें मानने को मजबूर हो
  • राष्ट्रीय इच्छाशक्ति ही किसी युद्ध का मूल कारण और समाधान होती है

उन्होंने कहा:

“हम मनोरोगी नहीं हैं जिन्हें दुश्मन के शव देखकर संतुष्टि मिले। युद्ध एक राष्ट्र की इच्छा को थोपने का तरीका है।”


इच्छाशक्ति और भारत का भविष्य

अजीत डोवल का यह बयान साफ संदेश देता है कि देश को मजबूत इच्छाशक्ति, चेतना और सुरक्षा दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
यह केवल युद्ध लड़ने की बात नहीं, बल्कि:

  • मानसिक शक्ति
  • रणनीतिक सोच
  • इतिहास का सम्मान
  • और राष्ट्रीय हित
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