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मॉस्को से कफ़नवाड़ा पहुँचा अजीत चौधरी का पार्थिव शरीर – 28 दिन की जद्दोजहद के बाद भारत लौटा बेटा, मेडिकल बोर्ड से अलवर में फिर हुआ पोस्टमार्टम…

अलवर जिले के कफ़नवाड़ा गांव का माहौल सोमवार सुबह एक बार फिर ग़म और आक्रोश से भर गया, जब रूस के ऊफ़ा शहर से मेडिकल के छात्र अजीत चौधरी का शव 28 दिनों बाद अपने गांव पहुँचा। लापता होने से लेकर शव मिलने और फिर भारत लाने तक की ये पूरी प्रक्रिया परिवार के लिए पीड़ा और इंतज़ार की लंबी कहानी बन गई।

आपको बताते है सिलसिलेवार पूरा घटना क्रम – कैसे शुरू हुई ये त्रासदी , अलवर के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के कफ़नवाडा गांव का रहने वाला अजीत रूस के उफा में 2023 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था , पिता रूप सिंह ने अपना खेत बेच कर अजीत को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था , लेकिन कुदरत को शायद ये मंजूर नहीं था।

19 अक्टूबर को अजीत चौधरी ने परिवार से आखिरी बार अपनी मां बात की थी , वार्तालाप सामान्य रही , लेकिन 20 अक्टूबर को अजीत के लापता होने की जानकारी परिजनों को मिली और उसका फोन बंद हो गया जिससे संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिवार ने कॉलेज प्रबंधन और हॉस्टल के अन्य छात्रों से बात की तो बताया गया कि वह 19 अक्टूबर को देर शाम हॉस्टल से कुछ सामान लेने के लिए बाहर गया था लेकिन लौटा नहीं ,
परिवार ने सोशल मीडिया, परिचितों और प्रशासन और केंद्र सरकार के माध्यम से उसकी खोजबीन शुरू की लेकिन अजीत का पता नहीं चल पाया

उधर अजीत की तलाश में लगी टीम को 20 अक्टूबर को अजीत के कपड़े बैग और कुछ सामान एक नदी किनारे मिला था जिसके बाद उसकी तलाश नदी में गोताखोरों ने भी शुरू की । इधर परिजनों का हाल बेहाल था ,खासकर अजीत की मां संतरा देवी जो रोते रोते बार बार बेहोश हो जाती ,यही हाल अजीत की बहन गीता का था ।

परिवार रूस में रहने वाले छात्रों, कॉलेज प्रबंधन , भारतीय दूतावास, स्थानीय अधिकारियों , जनप्रतिनिधियों से लगातार संपर्क में रहा। लेकिन किसी तरह का सुराग नहीं मिला।


परिजन आशंका और भय में दिन–रात एक करते रहे

लंबे इंतज़ार के बाद 6 नवंबर को रूस के ऊफ़ा शहर में बांध में अजीत चौधरी का शव बरामद हुआ। रूसी पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया और भारत सरकार को औपचारिक रूप से इसकी सूचना दी।
इसी के बाद शव को भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो काफ़ी जटिल और समय लेने वाली साबित हुई।

शव को भारत लाने की देरी – परिवार का रोष, प्रदर्शन

शव को भारत लाने की प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक लंबी चली।
इस देरी से आहत परिजनों और ग्रामीणों ने कफ़नवाड़ा गांव और अलवर में धरना–प्रदर्शन किया।
उनकी मांग थी कि भारत सरकार रूसी अधिकारियों से संपर्क बढ़ाकर प्रक्रिया तेज करे।
सोशल मीडिया पर भी मामले ने जोर पकड़ा।

अजीत का शव भारत लाने में प्रवासी भारतीयों की संस्था राजस्थान एसोसिएशन इन नॉर्दन अमेरिका ( राना) के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने परिवार से मिली स्वीकृति के बाद शव को भारत लाने के प्रयास किए जिसमें संस्था का करीब 3 लाख रु खर्च हुए ,

28 दिन बाद 15 नवंबर शुक्रवार को सुबह करीब 5 बजे अजीत का शव दिल्ली पहुँचा। परिजन सीधे दिल्ली एयरपोर्ट से अलवर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम की तैयारी पहले ही शुरू कर दी गई थी। इस दौरान अस्पताल में जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर , डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान सहित परिजन और ग्रामीण मौजूद थे ।

अलवर में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया

रूस से मिली मेडिकल रिपोर्ट में प्रारंभिक तौर पर अजीत की मौत पानी में डूबने से होना बताया गया है , परिजनों की मांग पर शव का अलवर जिला अस्पताल, में इस संवेदनशील मामले को देखते हुए तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों का विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया गया।
बोर्ड रूस में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के हवाले से अलग से विस्तृत जांच कर रहा है।

अलवर में पोस्टमार्टम के बाद कफ़नवाड़ा गांव में अजीत का शव जब घर पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया ,


हर किसी के मन में एक ही सवाल—


“अजीत के साथ रूस में आखिर हुआ क्या था?”

परिवार, ग्रामीण और प्रशासन अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जो मौत के कारणों से जुड़े कई सवालों के जवाब देगी।

एक उभरते डॉक्टर की अचानक हुई मौत और 28 दिनों बाद उसके पार्थिव शरीर के गांव लौटने की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब सबकी निगाहें मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस दुखद घटना के रहस्य से पर्दा उठाएगी।

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