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अलवर शहर में लेबर कोड के खिलाफ सांकेतिक धरना, तेजपाल सैनी बोले—मजदूरों के अधिकारों पर बड़ा खतरा

अलवर शहर में जिला श्रमिक कर्मचारी समन्वय समिति की ओर से बुधवार को शहीद स्मारक पर एक घंटे का सांकेतिक धरना दिया गया। कार्यक्रम संयोजक तेजपाल सैनी ने बताया कि यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) का जोरदार विरोध दर्ज कराना है।

तेजपाल सैनी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चार नए श्रम संहिताएँ लागू कर मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। इससे न केवल संगठित बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि श्रमिक संगठनों की मांगों को सरकार पिछले पांच वर्षों से नज़रअंदाज करती आ रही है। समिति लगातार लेबर कोड को वापस लेने की मांग कर रही है, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

श्रमिक संगठनों के अनुसार, चार नए श्रम संहिताओं से—मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे,
नौकरी की सुरक्षा कम होगी, ठेका प्रथा (कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) बढ़ेगी, काम के घंटों में बढ़ोतरी से कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा,और उद्योगों को अधिक छूट मिलने से श्रमिक शोषण बढ़ने की आशंका है।

संगठन का आरोप है कि इन कानूनों से बड़े उद्योगपतियों को फायदा होगा, जबकि मजदूरों का नुकसान तय है। इसी कारण देशभर में श्रमिक संगठन एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।

कर्मचारी नेता तेजपाल सैनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही श्रम संहिताओं को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई मजदूरों के हक, सुरक्षा और सम्मान के लिए है, और इसे किसी भी कीमत पर जारी रखा जाएगा।

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