दुनिया भर में आस्था का प्रतीक: भारत और विदेशों में स्थापित भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमाएँ….
भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमाएँ और मंदिर स्थापित किए गए हैं। अयोध्या से लेकर कनाडा और दक्षिण-पूर्व एशिया तक, श्रीराम की पूजा और उनकी महिमा सीमाओं से परे फैली हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा में 77 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गोवा में भगवान श्रीराम की 77 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह विश्व की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा है और भारत में भगवान राम की भव्यता और श्रद्धा का प्रतीक है।
कनाडा में श्रीराम की 51 फुट ऊंची मूर्ति
उत्तर अमेरिका के ओंटारियो के मिसिसॉगा स्थित हिंदू हेरिटेज सेंटर में 51 फीट ऊंची भगवान राम की फाइबरग्लास प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका स्टील फ्रेम इसे मजबूती और लंबी उम्र देता है। यह स्थल ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र में हिंदू धर्म और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बन गया है।
दुनिया में हिंदू धर्म और राम की महिमा
Pew Research Centre की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 1 अरब से अधिक हिंदू हैं। कनाडा में हिंदू धर्म तीसरे सबसे बड़े धर्म के रूप में है और 2021 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी का लगभग 2.3% हिस्सा हिंदू है। ऐसे में भगवान राम की 51 फुट की प्रतिमा ने पश्चिमी देशों में हिंदू आस्था को और मजबूती दी है।
थाईलैंड और लाओस में रामायण का सांस्कृतिक प्रभाव
दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण महाकाव्य का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रभाव है। लाओस में इसे फ्रा लाक फ्रा राम (Phra Lak Phra Ram) कहा जाता है। वहां के मंदिरों में रामायण की कथाओं को चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति और धर्म का अभिन्न हिस्सा हैं।
विश्वभर में श्रीराम की प्रतिमाएँ: आस्था और पहचान का प्रतीक
कनाडा, थाईलैंड, लाओस और भारत में स्थापित श्रीराम की प्रतिमाएँ दुनिया भर में सनातन धर्म और आस्था का प्रतीक बन चुकी हैं। ये स्थल न केवल धार्मिक श्रद्धा के केंद्र हैं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को भी मजबूत करते हैं।
श्रीराम की प्रतिमाएँ न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और धर्म की वैश्विक पहुंच को भी दर्शाती हैं। पश्चिमी देशों में हिंदू धर्म के फैलाव और स्थानीय समुदायों के बीच धार्मिक स्थलों की स्थापना से युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरूकता भी बढ़ती है।