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कलम और कर्तव्य का संगम: कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को ‘भरखमा’ पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार, राजस्थान गौरवान्वित

प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच साहित्य साधना का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए जयपुर के कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को उनके राजस्थानी कहानी संग्रह भरखमा के लिए देश के प्रतिष्ठित साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें एक लाख रुपये, शॉल और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया, जिससे पूरे राजस्थान के साहित्य जगत में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई।

दिल्ली में सम्मान, राजस्थान का बढ़ा मान

नई दिल्ली के रवींद्र भवन स्थित कमानी सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में अकादेमी अध्यक्ष माधव कौशिक ने डॉ. सोनी को सम्मानित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में देश की विविध भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित करते हुए भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा और एकता को रेखांकित किया गया।

‘भरखमा’: गांव, संवेदना और सच्चाई का दस्तावेज

भरखमा केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि राजस्थान के ग्रामीण जीवन, मानवीय रिश्तों और लोकसंस्कृति का जीवंत चित्रण है। डॉ. सोनी की यह कृति उनके बचपन के अनुभवों और आम जनजीवन की सच्चाइयों से जन्मी है। यही कारण है कि इस पर आधारित एक राजस्थानी फिल्म भी बन चुकी है, जिसने साहित्य और सिनेमा के बीच मजबूत सेतु का कार्य किया।

कलेक्टर के भीतर का संवेदनशील रचनाकार

हनुमानगढ़ जिले के धन्नासर गांव में जन्मे डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी प्रशासनिक सेवा में उत्कृष्ट भूमिका निभाने के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय हैं। वे राजस्थानी और हिंदी दोनों भाषाओं में कहानी, कविता, अनुवाद और संपादन के माध्यम से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। 15 से अधिक पुस्तकों के लेखक सोनी मानते हैं कि “साहित्य आत्मा को ऊर्जा देता है और एक बेहतर प्रशासक बनने में मदद करता है।”

सम्मानों की समृद्ध यात्रा

डॉ. सोनी को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्ष 2016 में उनके राजस्थानी काव्य संग्रह ‘रणखार’ के लिए साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार प्रदान किया गया था। वहीं हिंदी कृति ‘रेगमाल’ को भी राज्य स्तरीय सम्मान मिल चुका है। भरखमा के लिए उन्हें राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर का ‘मुरलीधर व्यास कथा साहित्य पुरस्कार’ भी मिल चुका है।

“यह सम्मान मेरी नहीं, भाषा और समाज की जीत”

डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने इस उपलब्धि को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजस्थानी भाषा, अपने गांव और आम जनजीवन का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं का उद्देश्य हमेशा आम आदमी की संवेदनाओं और सच्चाइयों को ईमानदारी से अभिव्यक्त करना रहा है।

उनका मानना है कि साहित्य व्यक्ति को अधिक संवेदनशील बनाता है और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराता है। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने सपनों के साथ-साथ अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहें—यही असली सफलता की पहचान है।

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