#देश दुनिया #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर #सोशल

अरावली फैसले के विरोध में उदयपुर में सड़कों पर उतरे लोग, कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन…..

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला को लेकर दिए गए हालिया फैसले के खिलाफ उदयपुर में सोमवार को जबरदस्त विरोध देखने को मिला। पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंतित नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। देखते ही देखते आक्रोश इतना बढ़ गया कि हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने फैसले को पर्यावरण के लिए घातक बताते हुए तत्काल पुनर्विचार की मांग की।


अरावली फैसले से भड़का जनाक्रोश

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली पर्वतमाला की श्रेणी से बाहर करना अत्यंत चिंताजनक है। उनका तर्क है कि उदयपुर और पूरे मेवाड़ क्षेत्र की अधिकांश पहाड़ियां इसी श्रेणी में आती हैं, जो वर्षों से जल संरक्षण और हरियाली का आधार रही हैं।


कलेक्ट्रेट के बाहर जुटी भारी भीड़

सोमवार सुबह से ही जिला कलेक्ट्रेट के बाहर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। “अरावली बचाओ”, “प्रकृति से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।


पुलिस बैरिकेडिंग पर बढ़े प्रदर्शनकारी

स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के आगे बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।


पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने संयम बरतते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बातचीत के जरिए हालात संभाले और किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और फैसले पर पुनर्विचार की मांग दोहराते रहे।


जल संरक्षण पर मंडराता खतरा

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यह फैसला लागू रहा, तो अरावली क्षेत्र में खनन और अंधाधुंध दोहन को बढ़ावा मिलेगा। इससे न सिर्फ भूजल स्तर तेजी से गिरेगा, बल्कि क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ जाएगा। उदयपुर जैसे जल संकटग्रस्त शहर के लिए यह फैसला भविष्य में गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।


मेवाड़ की पहाड़ियां पारिस्थितिकी की रीढ़

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मेवाड़ अंचल की छोटी-छोटी पहाड़ियां भी अरावली की पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं। ये पहाड़ियां बारिश के पानी को रोकने, हरियाली बनाए रखने और तापमान संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे और अरावली पर्वतमाला के संपूर्ण संरक्षण को सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर विकास स्वीकार्य नहीं।


आगे और तेज होगा आंदोलन?

प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आने वाले दिनों में राज्यभर में विरोध प्रदर्शन और जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी भी की जा रही है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *