#देश दुनिया #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर #सोशल

अरावली विवाद पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का बड़ा बयान, “भ्रम फैलाया जा रहा, 98% क्षेत्र पहले से ज्यादा सुरक्षित”……

अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे विवाद और कथित “नई परिभाषा” पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली में स्थिति स्पष्ट करते हुए अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की है। मंत्री ने साफ कहा कि अरावली को कमजोर करने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि सरकार ने संरक्षण को और सख्त किया है। नई परिभाषा कोई नया नियम नहीं, बल्कि वर्ष 2006 से लागू व्यवस्था की स्पष्ट व्याख्या मात्र है।


अरावली की “नई परिभाषा” को लेकर भ्रम क्यों

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कुछ वर्ग जानबूझकर यह प्रचार कर रहे हैं कि अरावली की सुरक्षा कम कर दी गई है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस 100 मीटर की बात की जा रही है, वह पहाड़ी की चोटी से नहीं, बल्कि पहाड़ के बेस स्ट्रक्चर से मापी जाती है।


बेस से 100 मीटर तक पूरा इलाका संरक्षित

मंत्री के अनुसार, पहाड़ जितनी जमीन के भीतर फैला होता है, वहां से ऊपर तक और चारों ओर 100 मीटर का क्षेत्र पूरी तरह प्रोटेक्टिव जोन में शामिल होगा। इसका मतलब है कि पहाड़ी के आसपास किसी भी तरह की गतिविधि अब पहले से ज्यादा कड़े दायरे में रहेगी।


आसपास की पहाड़ियां भी स्वतः होंगी सुरक्षित

भूपेंद्र यादव ने बताया कि यदि तय दायरे में कोई पहाड़ी आती है और उसके 500 मीटर के भीतर दूसरी पहाड़ी मौजूद है, तो वह दूसरी पहाड़ी भी स्वतः संरक्षित मानी जाएगी। इस परिभाषा के लागू होने से अरावली क्षेत्र का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा अब पूरी तरह प्रोटेक्टिव एरिया में शामिल हो गया है।


कोई नया नियम नहीं, 2006 से लागू व्यवस्था

मंत्री ने दो टूक कहा कि यह कोई नई अधिसूचना या रिपोर्ट नहीं है। वर्ष 2006 से ही राजस्थान सहित अरावली क्षेत्र में यह व्यवस्था लागू है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब टॉप ही नहीं, बल्कि जमीन के भीतर तक फैले पूरे पर्वत को स्पष्ट रूप से संरक्षण में शामिल किया गया है, ताकि किसी तरह की तकनीकी चालबाजी न हो सके।


चार राज्यों के 39 जिलों में फैली अरावली

अरावली पर्वतमाला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात—इन चार राज्यों में फैली हुई है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1 लाख 44 हजार वर्ग किलोमीटर है और इसमें 39 जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


माइनिंग पर सख्ती, सिर्फ 2% क्षेत्र में सीमित अनुमति

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पूरे अरावली क्षेत्र में से केवल लगभग 270 वर्ग किलोमीटर, यानी करीब 2 प्रतिशत इलाके में ही नियंत्रित माइनिंग की अनुमति संभव होगी। इसके लिए भी झारखंड के सारंडा क्षेत्र की तर्ज पर विस्तृत माइनिंग प्लान बनाना अनिवार्य होगा, जिसे संबंधित संस्थाओं की मंजूरी के बाद ही लागू किया जाएगा।


दिल्ली में पूरी तरह प्रतिबंध, फॉरेस्ट रिजर्व सुरक्षित

दिल्ली की अरावली पहाड़ियों में माइनिंग पहले की तरह पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही अरावली क्षेत्र में मौजूद 20 से अधिक फॉरेस्ट रिजर्व पहले की तरह पूर्ण संरक्षण में रहेंगे। अब पहाड़ी के नीचे से खुदाई कर नुकसान पहुंचाना संभव नहीं होगा।


सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई

भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पर्यावरण मंत्रालय और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर आधारित है। केंद्र सरकार ग्रीन अरावली अभियान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी कीमत पर पर्यावरणीय संतुलन से समझौता नहीं किया जाएगा।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *