दिल्ली में दिसंबर का सबसे खराब वायु गुणवत्ता रिकॉर्ड, GRAP-IV के बावजूद ज़हरीली हवा ने बनाया रिकॉर्ड…
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में दिसंबर 2025 का वायु गुणवत्ता स्तर पिछले आठ वर्षों में सबसे खराब दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में GRAP-IV (वायु प्रदूषण नियंत्रण) उपायों के बावजूद ज़हरीली धूल, स्मॉग और प्रदूषण के कणों ने एक बार फिर स्वास्थ्य के लिए चेतावनी स्तर पार कर लिया है। विशेषज्ञों ने कहा है कि स्थायी उपायों के अभाव में इस समस्या का समाधान कठिन है।
दिसंबर में सबसे खराब AQI दर्ज
भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इस दिसंबर माह के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रिकॉर्ड के अनुसार हवा की गुणवत्ता पिछले आठ सालों में सबसे बुरी पाई गई। मानक के हिसाब से ‘खराब से अधिक’ श्रेणी में प्रदूषण का स्तर दर्ज हुआ, जिससे सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और सांस की तकलीफों का खतरा बढ़ा है।
GRAP-IV उपायों के बावजूद परिणाम निराशाजनक
दिल्ली और एनसीआर में मौसम के बिगड़ते पैटर्न और कोहरे के बीच लागू किए गए GRAP-IV प्रदूषण नियंत्रण उपायों का असर सीमित रहा है। इन उपायों में निर्माण स्थल पर रोक, पॉल्यूशन युक्त वाहनों की आवाजाही नियंत्रण, औद्योगिक गतिविधियों पर पाबंदी आदि शामिल हैं। बावजूद इसके AQI स्तर में गिरावट को लेकर अपेक्षित सकारात्मक बदलाव नहीं दिखा।
मुख्य कारण — वाहनों और मौसम का मेल
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह वाहनों से उत्सर्जित धुएँ, उद्योगों के धुएँ और ठंड के मौसम में धूमकेतु जैसे कणों का जमाव है। ठंड के कारण हवा का प्रवाह धीमा हुआ और प्रदूषण ज़मीन के पास जकड़ गया, जिससे धूल और स्मॉग का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
फसल जलाने का प्रभाव भी अहम
हर साल की तरह इस बार भी आसपास के राज्यों, खासकर पंजाब और हरियाणा में खेतों में ठंडी फसलों के बाद बचे अवशेषों को जलाना एक महत्वपूर्ण कारण रहा है। इसमें निकलने वाला धुआँ दिल्ली-एनसीआर की हवा में मिलकर स्थिति को और ख़राब करता है, जो कि सर्दियों में और अधिक खतरनाक साबित होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि “AQI स्तर 500 के आस-पास या उससे ऊपर होने पर हवा बेहद हानिकारक हो जाती है। छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग, दम का रोगी और अन्य संवेदनशील लोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम के संपर्क में हैं।” विशेषज्ञों ने लोगों से मास्क पहनने, बाहरी गतिविधियां कम करने और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने की सलाह दी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन ने कहा है कि सैंपल विश्लेषण और मॉनिटरिंग लगातार जारी है। प्रदूषण बढ़ने के मामले में GRAP-IV उपाय लागू थे, लेकिन इसके बावजूद हवा खराब बनी रही। अधिकारियों ने भविष्य में लंबी अवधि की रणनीति, स्वच्छ ऊर्जा प्रोत्साहन और सख्त वाहन जांच नीति की आवश्यकता पर जोर दिया है।
आगे क्या राह है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली-एनसीआर की हवा समस्या के केवल तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए चाहिए:
✔ हरित क्षेत्र का विस्तार
✔ वाहनों के उत्सर्जन मानकों में कड़ाई
✔ प्रदूषण नियंत्रण की तकनीकी निगरानी
✔ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ कृषि पद्धति का प्रचार
तब ही हवा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो सकता है और राजधानीवासियों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह पाएगा।