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100 करोड़ की एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का पर्दाफाश

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में नशे के कारोबार का एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। खेतों के बीच बने एक मुर्गी फार्म की आड़ में चल रही करीब 100 करोड़ रुपये की एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स फैक्ट्री को पुलिस ने बेनकाब किया है। महाराष्ट्र एंटी नारकोटिक्स सेल और झुंझुनूं पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

सुनसान मुर्गी फार्म में चल रही थी एमडी ड्रग्स फैक्ट्री

झुंझुनूं जिले के नांद का बास गांव में खेतों के बीच स्थित एक पुराने मुर्गी फार्म में पिछले करीब 15 दिनों से एमडी ड्रग्स का अवैध निर्माण किया जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि फार्म का चयन जानबूझकर सुनसान इलाके में किया गया, ताकि ड्रग्स बनाने के दौरान आने वाली तेज केमिकल बदबू से किसी को शक न हो।

महाराष्ट्र एएनसी और झुंझुनूं पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

इस कार्रवाई को महाराष्ट्र पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल और झुंझुनूं पुलिस ने मिलकर अंजाम दिया। खुफिया सूचना के आधार पर की गई रेड में मौके से भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स, केमिकल्स और निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार फैक्ट्री से तैयार ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

फार्म का मालिकाना और राजनीतिक कनेक्शन

पुलिस जांच में सामने आया कि यह मुर्गी फार्म आरोपी अनिल सिहाग के चाचा सुरेश सिहाग का है, जो पिछले 7–8 वर्षों से संचालित हो रहा था। सुरेश सिहाग की पत्नी चुड़ैला ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच रह चुकी हैं। पहले नांद का बास गांव चुड़ैला ग्राम पंचायत में ही शामिल था, लेकिन हाल ही में परिसीमन के बाद इसे अलग ग्राम पंचायत बना दिया गया है।

बदबू से बचने के लिए अपनाया गया था यह तरीका

एमडी ड्रग्स के निर्माण के दौरान तेज और असहनीय बदबू आती है। इसी वजह से आरोपियों ने आबादी से दूर खेतों के बीच बने मुर्गी फार्म को चुना। मुर्गी फार्म की आड़ में केमिकल की बदबू को छिपाने की कोशिश की गई, ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह का संदेह न हो।

आरोपी अनिल सिहाग का आपराधिक इतिहास

गिरफ्तार आरोपी अनिल कुमार सिहाग 12वीं पास है और पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त रह चुका है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2016–17 में वह अपने चाचा के इसी मुर्गी फार्म पर काम करता था। उसी दौरान उसकी पहचान सुभाष नामक व्यक्ति से हुई, जिसके बाद वह नीमच से डोडा पोस्त लाकर आसपास के इलाकों में सप्लाई करने लगा।

पहले भी जा चुका है जेल, नेटवर्क की जांच जारी

डोडा पोस्त तस्करी के एक मामले में अनिल सिहाग पहले जेल भी जा चुका है। पुलिस को आशंका है कि इस एमडी ड्रग्स फैक्ट्री के पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश तेज कर दी गई है।

नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, आगे और खुलासों की उम्मीद

यह कार्रवाई न केवल झुंझुनूं बल्कि पूरे राजस्थान में नशे के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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