Year Ender 2025: लिडिया थॉर्प से नादिया मुराद तक, महिलाओं ने सियासत की भाषा ही बदल दी…
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
2025 वैश्विक राजनीति में महिलाओं के लिए सिर्फ सत्ता और पद का साल नहीं रहा, बल्कि यह साल विरोध, साहस और व्यवस्था को चुनौती देने का प्रतीक बन गया। इस वर्ष महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निजी अनुभवों, प्रतीकात्मक विरोध और वैश्विक मंचों के जरिए उस सत्ता-भाषा को सवालों के घेरे में खड़ा किया, जो दशकों से पुरुष-प्रधान रही है।
कहीं संसद के भीतर हंगामा हुआ, तो कहीं यौन शोषण के आरोपों ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों से इंसाफ की मांग ने दुनिया का ध्यान खींचा।
ऑस्ट्रेलिया: लिडिया थॉर्प का परमाणु ऊर्जा पर सीधा टकराव
4 फरवरी 2025 को ऑस्ट्रेलिया की सीनेटर लिडिया थॉर्प ने कैनबरा स्थित पार्लियामेंट हाउस में उस समय सबको चौंका दिया, जब वह एक प्रो-न्यूक्लियर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक घुस गईं।
सीनेटर थॉर्प ने जोरदार आवाज में आरोप लगाया कि सरकार को परमाणु ऊर्जा को लेकर कोई जन-अनुमति नहीं है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़हर साबित होगी। उन्होंने खास तौर पर ‘AUKUS डील’ और न्यूक्लियर वेस्ट को आदिवासी भूमि और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बताया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। समर्थकों ने इसे साहसिक विरोध बताया, जबकि आलोचकों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट करार दिया।
नाइजीरिया: ‘वी आर ऑल नताशा’ बना महिला प्रतिरोध का प्रतीक
नाइजीरिया में 2025 का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन ‘वी आर ऑल नताशा’ के नाम से उभरा। सांसद नताशा अकपोटी-उडुआघन ने 28 फरवरी 2025 को एक टीवी इंटरव्यू में सीनेट प्रेसिडेंट गॉडस्विल अकपाबियो पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए।
मार्च में नताशा ने सीनेट में औपचारिक याचिका दाखिल की, लेकिन एथिक्स कमिटी ने उसे खारिज कर दिया। इसके अगले ही दिन सीनेट ने उन्हें छह महीने के लिए निलंबित कर दिया—वेतन, सुरक्षा और दफ्तर की सुविधाएं भी छीन ली गईं। आधिकारिक वजह ‘अशिष्ट व्यवहार’ बताई गई, जबकि नताशा ने इसे बदले की कार्रवाई कहा।
इसके बाद महिला अधिकार संगठनों, सिविल सोसाइटी और आम महिलाओं ने देशभर में प्रदर्शन किए और ‘वी आर ऑल नताशा’ एक राष्ट्रीय कैंपेन में बदल गया।
पॉलीन हैंसन का बुर्का स्टंट: संसद से सड़क तक विवाद
24 नवंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया की दक्षिणपंथी सीनेटर पॉलीन हैंसन संसद में बुर्का पहनकर पहुंचीं। यह कदम उन्होंने उस बिल के विरोध में उठाया, जिसे संसद ने सार्वजनिक स्थलों पर बुर्का बैन के लिए पेश करने से इनकार कर दिया था।
हैंसन ने बुर्का को महिलाओं पर दमन और सुरक्षा जोखिम का प्रतीक बताते हुए इसे उतारने से मना कर दिया। इस कारण संसद की कार्यवाही करीब डेढ़ घंटे तक स्थगित रही।
मुस्लिम सांसदों—फातिमा पैमन और मेहरीन फरूकी—ने इसे नस्लवादी और इस्लामोफोबिक करार दिया। अगले दिन, 25 नवंबर 2025 को संसद ने पॉलीन हैंसन को सात दिनों के लिए निलंबित कर दिया, जिसका असर 2026 तक रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र में नादिया मुराद: ‘सिर्फ याद नहीं, कार्रवाई चाहिए’
22 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल मीटिंग में नादिया मुराद का भाषण पूरी दुनिया में गूंजा। याजीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नादिया मुराद ने युद्धग्रस्त इलाकों में यौन हिंसा और महिलाओं के अधिकारों पर सीधा सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि अत्याचारों को सिर्फ याद करना काफी नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही जरूरी है। अगली पीढ़ी को खोखले वादों के बजाय समानता और गरिमा की वास्तविकता मिलनी चाहिए।
यह भाषण याजीदी नरसंहार और महिलाओं पर हुए संगठित अत्याचारों की पृष्ठभूमि में बेहद प्रभावशाली माना गया।
मारिया कोरिना मचाडो: लोकतंत्र की आवाज को नोबेल सम्मान
दिसंबर 2025 में वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक नेता मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने 10 अक्टूबर 2025 को उनके नाम की घोषणा की थी।
उन्हें वेनेजुएला में तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष और नागरिक अधिकारों की लड़ाई के लिए यह सम्मान दिया गया। पुरस्कार मिलने के बाद मचाडो का बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने इसे लोकतंत्र की लड़ाई को समर्पित बताया।
2025 में महिलाओं ने सत्ता नहीं, सोच बदली
2025 यह साबित कर गया कि महिलाओं की भूमिका सिर्फ सरकार चलाने तक सीमित नहीं है। इस साल महिलाओं ने संसद, सड़क और वैश्विक मंचों पर सत्ता को चुनौती दी, सवाल पूछे और असहज सच्चाइयों को सामने रखा।
यह साल राजनीति में महिलाओं की मौजूदगी से आगे बढ़कर, उनके प्रभाव और प्रतिरोध का साल बनकर दर्ज हुआ।