Year Ender 2025: राजनीतिक भूचाल का साल, कई देशों में कार्यकाल से पहले गिरी सरकारें…
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
2025 दुनिया की राजनीति के लिए अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन का साल बनकर सामने आया। इस वर्ष कई ऐसे देश रहे, जहां सरकारें अपना संवैधानिक कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। कहीं जनआंदोलन ने सरकार की नींव हिला दी, तो कहीं संसद में बहुमत साबित न कर पाने के कारण प्रधानमंत्री को पद छोड़ना पड़ा। राजनीतिक उथल-पुथल ने यह साफ कर दिया कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं, बल्कि जनता और संसद की कसौटी पर टिकी होती है।
आइए जानते हैं उन देशों के बारे में, जहां 2025 में सरकारें बीच रास्ते ही गिर गईं।
नेपाल: युवाओं के आक्रोश ने केपी ओली सरकार को झुकने पर मजबूर किया
नेपाल इस साल राजनीतिक अस्थिरता का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा। देश में फैले भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं ने बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ दिया। जेन-जी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह विरोध जल्द ही हिंसक हो गया। राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में आगजनी और झड़पों की घटनाएं सामने आईं।
हालात बेकाबू होने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को युवाओं की मांगों के आगे झुकना पड़ा। नेपाल की राजनीति पहले से ही अस्थिर रही है—पिछले लगभग 17 वर्षों में कोई भी सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है, और 2025 ने इस परंपरा को एक बार फिर दोहरा दिया।
पुर्तगाल: संसद में विश्वास मत हारने से गिर गई दक्षिणपंथी सरकार
यूरोपीय देश पुर्तगाल में भी 2025 सत्ता परिवर्तन का साल साबित हुआ। प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनग्रो के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार मार्च महीने में संसद में विश्वास मत हार गई। विपक्षी दलों ने सरकार को समर्थन देने से इनकार कर दिया, जिससे प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
इसके बाद राष्ट्रपति ने संसद को भंग कर दिया और देश में 18 मई 2025 को दोबारा आम चुनाव कराए गए। यह घटनाक्रम बताता है कि गठबंधन सरकारों के लिए संसदीय समर्थन कितना निर्णायक होता है।
बेनिन: सैन्य तख्तापलट ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोका
पश्चिमी अफ्रीकी देश बेनिन में 2025 लोकतंत्र के लिए झटका लेकर आया। 7 दिसंबर को कुछ सैन्य गुटों ने तख्तापलट का दावा किया। खुद को मिलिट्री कमेटी फॉर रिफाउंडेशन (CMR) कहने वाले इस समूह ने सरकारी टेलीविजन पर ऐलान किया कि उन्होंने राष्ट्रपति पैट्रिस टैलोन को पद से हटा दिया है।
यह घोषणा ऐसे समय पर हुई, जब देश राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहा था और टैलोन का कार्यकाल समाप्ति की ओर था। सैन्य हस्तक्षेप ने न सिर्फ सरकार का कार्यकाल अधूरा छोड़ा, बल्कि बेनिन की लोकतांत्रिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए।
जर्मनी: गठबंधन टूटने से चांसलर ओलाफ शोल्ज की विदाई
जर्मनी में चांसलर ओलाफ शोल्ज के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार 2025 में बहुमत खो बैठी। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी, ग्रीन पार्टी और फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी का गठबंधन 2021 से सत्ता में था, लेकिन 2024 के अंत से ही आंतरिक मतभेद सामने आने लगे थे।
इन मतभेदों का असर संसद बुंडेस्टाग में दिखा, जहां सरकार कई अहम विधेयक पास कराने में नाकाम रही। अंततः विश्वास प्रस्ताव हारने के बाद शोल्ज की सरकार गिर गई, जिससे यूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई।
जापान: चुनावी हार के बाद प्रधानमंत्री ने ली जिम्मेदारी
एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्था जापान में भी सत्ता परिवर्तन देखने को मिला। जुलाई 2025 में हुए निचले सदन के चुनावों में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) को हार का सामना करना पड़ा।
इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री शिगेरु इशीबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एलडीपी ने ही साने ताकाइची को नया प्रधानमंत्री चुना। यह घटनाक्रम जापान की राजनीतिक संस्कृति में जवाबदेही की मिसाल के तौर पर देखा गया।
2025 ने क्यों बढ़ाई वैश्विक राजनीति की अस्थिरता?
2025 में सरकारों के गिरने के पीछे अलग-अलग कारण रहे—कहीं जन असंतोष, कहीं गठबंधन की कमजोरी, तो कहीं सैन्य दखल। लेकिन इन सभी घटनाओं में एक समानता साफ नजर आई—लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता, संसद और संस्थाओं की भूमिका निर्णायक बनी रही।
यह साल दुनिया को यह संदेश देकर गया कि सत्ता में बने रहना सिर्फ चुनाव जीतने से नहीं, बल्कि भरोसा कायम रखने से तय होता है।