टिब्बी एथेनॉल फैक्ट्री विवाद ने पकड़ा आंदोलन का रुख
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा किसान विरोध अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। 10 दिसंबर को हुए प्रदर्शन और किसानों पर लाठीचार्ज के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। इसी क्रम में 17 दिसंबर को होने वाली किसान महापंचायत से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का बयान चर्चा में है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
टिब्बी एथेनॉल फैक्ट्री बना विवाद की जड़
हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर स्थानीय किसानों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से उनकी उपजाऊ जमीन, जलस्तर और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। इसी मुद्दे पर 10 दिसंबर को किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जो बाद में तनावपूर्ण हो गया और पुलिस लाठीचार्ज की स्थिति बनी।
17 दिसंबर को महापंचायत का ऐलान, माहौल गरमाया
किसान संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर 17 दिसंबर को हनुमानगढ़ में महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है। महापंचायत की घोषणा के बाद से जिले में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
राकेश टिकैत का बयान वायरल, सियासी और प्रशासनिक हलचल
महापंचायत से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में टिकैत किसानों से तैयार रहने की अपील करते हुए कहते हैं कि यदि कहीं गड़बड़ी हुई तो किसान एकजुट होकर जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैक्टर के बम्पर मजबूत होने चाहिए, क्योंकि जरूरत पड़ने पर ट्रैक्टर ही टैंक का काम करेगा। इस बयान के बाद प्रशासन की सतर्कता और बढ़ गई है।
हजारों किसानों के जुटने का दावा
किसान संगठनों का दावा है कि इस महापंचायत में 20 हजार से अधिक किसान शामिल हो सकते हैं। हनुमानगढ़ के आसपास के जिलों के अलावा पंजाब और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए महापंचायत को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
किसानों का तर्क: यह सिर्फ फैक्ट्री नहीं, अधिकारों की लड़ाई
किसानों का कहना है कि यह संघर्ष केवल टिब्बी की एथेनॉल फैक्ट्री तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार यह आंदोलन जमीन, पानी, पर्यावरण और किसानों के भविष्य से जुड़ा है। किसान संगठनों का आरोप है कि बिना सहमति और पारदर्शिता के बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट थोपे जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन अलर्ट, शांति बनाए रखने की अपील
राकेश टिकैत के बयान और महापंचायत की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है और अधिकारियों की ओर से सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि किसान आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार व प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।