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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद सरिस्का में लापरवाही, 25 में से 23 सिफारिशें अब भी अधूरी

सरकार की सुस्ती बनाम वन्यजीव संरक्षण

सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और तय समय-सीमा के बावजूद सरिस्का टाइगर रिजर्व से जुड़ी अहम सिफारिशों पर अमल नहीं हो सका है। बाघ संरक्षण, अवैध पर्यटन नियंत्रण और पर्यावरण अनुकूल परिवहन जैसे मुद्दों पर सरकार की तैयारी कमजोर नजर आ रही है। नतीजतन, अब राज्य सरकार को अतिरिक्त समय के लिए फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

डेडलाइन खत्म, अमल शून्य
सरिस्का टाइगर रिजर्व को सुरक्षित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की 25 सिफारिशों को लागू करने की अंतिम तिथि 11 दिसंबर 2025 तय की थी। लेकिन समय-सीमा बीत जाने के बावजूद अधिकांश सिफारिशें कागजों में ही अटकी रहीं। मुख्य सचिव द्वारा हलफनामा दिए जाने के बाद भी न स्पेशल टाइगर टास्क फोर्स बनी और न ही एलिवेटेड रोड का काम शुरू हुआ।

ई-बस योजना बनी सबसे बड़ी बाधा

सरिस्का में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ नियंत्रित करने के लिए ई-बस संचालन को प्रमुख समाधान माना गया था। पांडुपोल मार्ग पर मंगलवार, शनिवार और पूर्णिमा को ई-बस चलाने की सिफारिश की गई थी। राजस्थान रोडवेज ने टेंडर भी जारी किए, लेकिन किसी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई। अधिकारियों का कहना है कि सीमित दिनों की भीड़ के कारण यह योजना निजी कंपनियों को लाभकारी नहीं लग रही। अब सरकार ई-बस के साथ सीएनजी बसें चलाने की अनुमति मांगने की तैयारी में है।

अवैध निर्माण और चराई पर ढीली कार्रवाई
बफर जोन में अवैध होटल और निर्माण हटाने के निर्देश भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाए। कुछ होटलों को जरूर बंद कराया गया, लेकिन कई अब भी संचालित हैं। इसी तरह जंगल में अवैध पशु चराई पर रोक लगाने में प्रशासन केवल समझाइश तक सीमित है, ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई।

ग्रेवल रोड और एलिवेटेड रोड पर अटका काम
सदर गेट और टहला गेट से पांडुपोल तक 31 किलोमीटर ग्रेवल रोड विकसित करने के लिए 7.40 करोड़ रुपये का टेंडर पूरा हो चुका है, इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका। वहीं तालवृक्ष से नटनी का बारां तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर भी अब तक निर्णय नहीं हो पाया है।

सीटीएच और ईएसजेड पर अनिश्चितता
सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटाट (सीटीएच) के पुनर्सीमांकन का प्रस्ताव अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी न होने से ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) का निर्धारण भी अटका हुआ है। जब तक ये सीमाएं तय नहीं होंगी, टाइगर संरक्षण योजना को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।

क्या-क्या हुआ पूरा

सिलीबेरी गेट से दोपहिया वाहनों का प्रवेश बंद

डीजे और तेज आवाज वाले वाहनों पर रोक

पांडुपोल हनुमान मंदिर का सीमांकन पूरा

20 ‘बाघ मित्र’ तैनात

टहला-सरिस्का रोड डिनोटिफाई

अब भी लंबित प्रमुख कार्य

विशेष टाइगर सुरक्षा बल का गठन

अवैध चराई पर प्रभावी रोक

मंदिर रसोई में सौर ऊर्जा/इलेक्ट्रिक चूल्हे

अतिरिक्त स्टाफ पदों की स्वीकृति

ई-बस संचालन की ठोस व्यवस्था

सरकार फिर मांगेगी समय
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसीए अरुण प्रसाद का कहना है कि ई-बस संचालन सबसे अहम सिफारिश है, जिस पर लगातार निगरानी की जा रही है। सभी अधूरे कार्य पूरे करने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग करेगी।

सरिस्का जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व में संरक्षण से जुड़े फैसलों में देरी न केवल बाघों के भविष्य के लिए खतरा है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त समय मिलने पर सरकार जमीन पर कितना असर दिखा पाती है।

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