अलवर की सिलीसेढ़ झील को मिली वैश्विक मान्यता, बना भारत का 95वां रामसर स्थल
राजस्थान के अलवर जिले की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर सिलीसेढ़ झील ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स की सूची में शामिल करते हुए रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही सिलीसेढ़ अब विश्व के उन चुनिंदा जल क्षेत्रों में शामिल हो गई है, जिनका संरक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत किया जाएगा। यह न सिर्फ अलवर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व का क्षण है।
रामसर संधि के तहत वैश्विक संरक्षण
दुनिया के लगभग 160 देश रामसर संधि का हिस्सा हैं, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि क्षेत्रों का चयन किया जाता है। इसी प्रक्रिया में सिलीसेढ़ झील (राजस्थान) और कोपरा जलाशय (छत्तीसगढ़) को नई रामसर साइट के रूप में मान्यता मिली है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है, जबकि राजस्थान में अब कुल 5 रामसर साइट्स हो चुकी हैं।
प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना
सिलीसेढ़ झील लंबे समय से जैव विविधता का प्रमुख केंद्र रही है। यहां हर वर्ष साइबेरिया, अफगानिस्तान, मंगोलिया सहित कई देशों से 150 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। नमीयुक्त भूमि, प्राकृतिक चारागाह, सुरक्षित प्रजनन स्थल और समृद्ध जलीय जीवन इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड बनाते हैं। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार झील सभी जरूरी जैविक और पर्यावरणीय मानकों पर खरी उतरी है।
ऐसे मिलता है रामसर साइट का दर्जा
किसी भी झील या वेटलैंड को रामसर साइट बनने के लिए कड़े मापदंडों से गुजरना होता है। हर साल कम से कम 20 हजार पक्षियों का आना या किसी एक वैश्विक पक्षी प्रजाति की कुल आबादी का 1 प्रतिशत उस क्षेत्र में होना अनिवार्य है। सिलीसेढ़ के मामले में वन विभाग और जिला प्रशासन ने विस्तृत प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा, वहां से यह केंद्र सरकार और फिर संयुक्त राष्ट्र के रामसर सचिवालय तक पहुंचा। जांच के बाद सभी मानकों पर खरा उतरने पर दर्जा मिला।
पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा
रामसर साइट बनने के बाद सिलीसेढ़ झील का संरक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाएगा। इससे अवैध कब्जों पर कार्रवाई, जल गुणवत्ता सुधार, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूती मिलेगी। साथ ही होम-स्टे, ईको-टूरिज्म और पर्यटन इकाइयों के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
भारत की बड़ी छलांग, अलवर की अहम भूमिका
भारत में 2014 में जहां केवल 26 रामसर साइट्स थीं, वहीं अब यह संख्या 95 तक पहुंच चुकी है। इस उपलब्धि में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री एवं अलवर सांसद भूपेंद्र यादव की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिलीसेढ़ को मिली यह पहचान भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और जल संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है।
सिलीसेढ़ अब वैश्विक धरोहर
रामसर साइट का दर्जा मिलने के साथ सिलीसेढ़ झील अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित प्राकृतिक धरोहर बन चुकी है। यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास के बीच संतुलन का एक सशक्त उदाहरण है।