लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर बहस के दौरान भावुक हुए सपा सांसद अवधेश प्रसाद, राम मंदिर समारोह को लेकर लगाया बड़ा आरोप
नई दिल्ली:
लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान समाजवादी पार्टी के फैजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें हाल ही में अयोध्या में हुए राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह और दीपावली कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि अयोध्या की जनता और प्रभु श्रीराम के भक्तों का भी अपमान है।
‘वंदे मातरम्’ की भावना के खिलाफ सरकार का व्यवहार: अवधेश प्रसाद
लोकसभा में बोलते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि
‘वंदे मातरम्’ देश की एकता, अखंडता और भाईचारे का प्रतीक है, लेकिन सरकारों का व्यवहार इस भावना के अनुरूप नहीं दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि आज समाज में भेदभाव बढ़ रहा है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ हमें जोड़ने का संदेश देता है।
उन्होंने बताया कि 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल हुए, लेकिन उन्हें उस ऐतिहासिक अवसर पर न तो पास दिया गया और न ही आमंत्रण भेजा गया।
“यह मेरा नहीं, अयोध्या की जनता का अपमान है”
सपा सांसद ने भावुक अंदाज़ में कहा कि
“मुझे नहीं समझ आया कि मुझे उस कार्यक्रम में क्यों नजरअंदाज किया गया। यह सिर्फ अवधेश प्रसाद का नहीं, बल्कि अयोध्या के लोगों और प्रभु श्रीराम के भक्तों का अपमान है। इससे ‘वंदे मातरम्’ का संदेश अधूरा रह जाता है।”
राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर तीखा हमला
अवधेश प्रसाद से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चर्चा में हिस्सा लिया और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के साथ जो अन्याय हुआ, वह तुष्टीकरण की राजनीति का नतीजा था, जिसकी शुरुआत कांग्रेस ने की थी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज़ादी के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को समान दर्जा देने की बात थी, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ को उसका पूरा सम्मान नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बंगाल की धरती पर ‘वंदे मातरम्’ की रचना हुई, उसी धरती पर इसे खंडित किया गया।
सियासी बहस तेज, मुद्दा बना राष्ट्रीय सम्मान और राजनीति
लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर हुई इस चर्चा ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
एक तरफ सरकार पर भेदभाव के आरोप लगे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पर ऐतिहासिक अन्याय का आरोप दोहराया गया है।
अब यह मुद्दा केवल राम मंदिर समारोह के निमंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और राजनीतिक आचरण पर बड़ी बहस बनता जा रहा है।