नेहा सिंह राठौर की बढ़ी कानूनी मुश्किलें, हाईकोर्ट से राहत नहीं—अब सुप्रीम कोर्ट में लगाएंगी गुहार
“नेहा सिंह राठौर की जमानत अर्जी खारिज—अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगी”
भोजपुरी सिंगर और यूट्यूबर नेहा सिंह राठौर की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद उन्होंने राहत की उम्मीद में अब सर्वोच्च न्यायालय जाने का फैसला किया है। विवादित बयानों के मामले में लगातार बढ़ रही कानूनी कार्रवाई के बीच नेहा ने कहा है कि वे कानून का सम्मान करती हैं और पुलिस जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। आइए पूरी खबर पर डालते हैं एक विस्तृत नज़र—
हाईकोर्ट का झटका—अग्रिम जमानत याचिका खारिज
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। यह वही याचिका थी जिसके जरिए नेहा ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद उनके सामने कानूनी विकल्प सीमित रह गए हैं।
नेहा का बयान—“अदालत सर्वोपरि, अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे”
याचिका खारिज होने के बाद नेहा ने एएनआई से बातचीत में कहा कि वे अदालत के निर्णय का सम्मान करती हैं और अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगेंगी। उनका कहना है कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाएंगी और कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगी।
पुलिस कार्रवाई पर बयान—’नोटिस नहीं मिला, सहयोग करने को तैयार’
नेहा ने दावा किया कि अभी तक उन्हें किसी भी तरह का औपचारिक पुलिस नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस यदि उनसे संपर्क करती है तो वे पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार हैं। नेहा के अनुसार—
“वे मुझे फोन करें, मैं तुरंत अपनी लोकेशन बता दूंगी। जरूरत हुई तो मैं खुद पुलिस के पास चली जाऊंगी।”
विवादित टिप्पणियों से जुड़े कई मामले बढ़ाए परेशानी
नेहा सिंह राठौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और पहलगाम घटना से जुड़ी प्रतिक्रियाओं के चलते कई शिकायतें दर्ज हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पुलिस उनकी तलाश और कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।
—क्या सुप्रीम कोर्ट में मिलेगी राहत?
नेहा के मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट उन्हें अंतरिम राहत देगा। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम आपराधिक शिकायतों के दायरे से जुड़ा है। ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट अक्सर यह देखता है कि—
बयान कितना गंभीर था?
वह सार्वजनिक शांति भंग कर सकता था या नहीं?
शिकायतें राजनीतिक प्रेरित हैं या तथ्यात्मक आधार पर?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नेहा को कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है, लेकिन यह पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिक परीक्षण सुनवाई पर निर्भर करेगा।
नेहा सिंह राठौर का मामला अब सीधे सर्वोच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंचने वाला है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट उनकी अग्रिम जमानत पर क्या रुख अपनाता है।
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक व्यंग्य और कानूनी दायरे—तीनों के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बन गया है।