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“हुमायूं कबीर का ममता बनर्जी पर तगड़ा हमला, राजनीति में मची हलचल”

पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों बड़ा बवाल मचा हुआ है। TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए दावा कर दिया कि 2026 के चुनाव के बाद वे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगी। बाबरी जैसी मस्जिद बनाने के ऐलान के बाद कबीर का पार्टी से निलंबन और अब नई पार्टी बनाने के संकेत—बंगाल की राजनीति को गर्माए हुए हैं।

अगली बार ममता सीएम नहीं बनेंगी”—हुमायूं कबीर का दावा

टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बड़ा राजनीतिक हमला किया है। उन्होंने दावा किया कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी सत्ता में वापसी नहीं कर पाएंगी और वे “पूर्व मुख्यमंत्री” कहलाएंगी। कबीर के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।

निलंबन के बाद राजनीतिक हमले तेज

कबीर को हाल ही में उस वक्त TMC ने निलंबित किया था जब उन्होंने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद जैसी संरचना की नींव रखने का ऐलान किया था। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की। हालांकि कबीर ने कहा कि उन्हें यह निलंबन “अपमानजनक” और “साजिश” लग रहा है।

ममता बनर्जी पर सीधा वार

पत्रकारों से बातचीत में कबीर ने कहा—
“मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री बनना है। 2026 में वह शपथ नहीं लेंगी।”
उनके इस बयान ने चुनाव से पहले की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत दे दिए हैं।

नई पार्टी बनाने के संकेत

कबीर ने साफ कहा कि वे टीएमसी से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं। उन्होंने 22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा करने की भी संभावना जताई है।
उनके मुताबिक—
“मुझे पार्टी से निलंबित किया है, विधायक पद से नहीं। मीटिंग के बाद आगे की घोषणा करूंगा।”

बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का विवादित ऐलान

हुमायूं कबीर ने घोषणा की थी कि वे बेलदांगा (मुर्शिदाबाद) में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद जैसी एक मस्जिद की नींव रखेंगे।
यह बयान आते ही बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई।
उन्होंने दावा किया था कि मस्जिद का निर्माण तीन साल में पूरा होगा और कई मुस्लिम नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

निलंबन के वक्त थे TMC की रैली में मौजूद

निलंबन की खबर तब सामने आई जब कबीर बहरामपुर में TMC की एसआईआर विरोधी रैली में मौजूद थे।
उन्होंने कहा—
“मुझे कोई पत्र नहीं मिला। यह जानबूझकर किया गया अपमान है।”
कबीर ने यह भी कहा कि वे शुक्रवार या सोमवार को विधायक पद से भी इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।

बंगाल में बढ़ रही राजनीतिक तेज़ी

हुमायूं कबीर का यह कदम सिर्फ एक व्यक्तिगत राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि TMC के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत भी माना जा रहा है।
2026 के चुनाव के लिए विपक्ष पहले ही रणनीति बना रहा है और अब TMC से निकले नेताओं की नई राजनीतिक जमीन तैयार होने लगी है।
कबीर की नई पार्टी अगर बनती है तो यह अल्पसंख्यक वोट बैंक के समीकरण पर भी असर डाल सकती है।

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