“भजनलाल शर्मा की बिना प्रोटोकॉल मॉर्निंग वॉक, ‘फिट राजस्थान’ का संदेश”
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार सुबह एक बार फिर यह संदेश दिया कि सत्ता बदलने से उनकी जीवनशैली नहीं बदली। बिना किसी औपचारिक प्रोटोकॉल के वे अचानक जयपुर के जवाहर सर्किल पार्क पहुंचे और आम लोगों की तरह मॉर्निंग वॉक करते नजर आए। उनका यह कदम एक ओर जनता के बीच सहज संवाद स्थापित करने का प्रयास था, वहीं दूसरी ओर पूरे राज्य को फिटनेस के लिए प्रेरित करने वाला संदेश भी।
मुख्यमंत्री का अनौपचारिक पहुंचना बना चर्चा का विषय
बिना प्रोटोकॉल CM का पहुंचना लोगों के लिए चौंकाने वाला पल
शनिवार तड़के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बेहद सीमित सुरक्षा के साथ जवाहर सर्किल पहुंचे। आम दिनों में जहां मुख्यमंत्री का तय प्रोटोकॉल और रूट रहता है, वहीं इस बार उनका सहज अंदाज देखकर पार्क में मौजूद लोग हैरान रह गए। अचानक पार्क में मुख्यमंत्री को अपने बीच चलते देख लोग उनके साथ बातचीत करते और फोटो लेते नजर आए।
पुरानी दिनचर्या से जुड़ा CM का आत्मीय रिश्ता
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं छोड़ी जवाहर सर्किल की पुरानी आदत
भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बनने से पहले नियमित रूप से इसी पार्क में सैर किया करते थे, और अब भी समय मिलते ही वे अपनी इस पुरानी दिनचर्या को जारी रखते हैं। मुख्यमंत्री प्रतिदिन निवास पर योग और वॉक करते हैं, लेकिन मौका मिलता है तो वे शहर के अलग-अलग पार्कों में पहुँचकर लोगों के बीच सहज माहौल में समय बिताना पसंद करते हैं।
जनसंपर्क और फिटनेस—दोनों उद्देश्य साधा
‘फिट राजस्थान’ का संदेश और जनता से जुड़ने का अनोखा अंदाज
इस बार की मॉर्निंग वॉक के पीछे मुख्यमंत्री का उद्देश्य स्पष्ट था—राजस्थान में फिटनेस को बढ़ावा देना और आमजन से बिना किसी औपचारिकता के सीधे संवाद स्थापित करना। उनके इस कदम से एक ओर प्रदेश में हेल्थ और फिटनेस को लेकर सकारात्मक संदेश गया, वहीं लोगों को लगा कि मुख्यमंत्री आज भी अपने सरल और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व को बनाए हुए हैं।
सरलता की राजनीति—जनता के बीच विश्वास बढ़ाने की रणनीति
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यह अनौपचारिक मॉर्निंग वॉक केवल फिटनेस का संदेश नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी है। जनता के बीच सीधे जाकर संवाद करना और बिना प्रोटोकॉल घूमना उनकी सहजनुमा छवि को मजबूत करता है। यह तरीका लोगों में भरोसा पैदा करता है कि सरकार का मुखिया अब भी जनता के बीच सहजता से मौजूद है।
‘फिट राजस्थान’ अभियान को व्यक्तिगत उदाहरण के साथ आगे बढ़ाना भी जननेताओं की उस श्रेणी में उन्हें खड़ा करता है जो कथनी से ज्यादा करनी पर विश्वास करते हैं।