भारत दौरे से पहले पुतिन का बड़ा ऐलान: “PM मोदी से करूंगा सीधी बात… बड़ी डील तैयार”
भारत आने से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली मुलाकात में व्यापार संतुलन, ऊर्जा साझेदारी, रक्षा तकनीक और नेशनल करेंसी में ट्रेड जैसे अहम मुद्दों पर बड़े फैसले हो सकते हैं। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर युद्ध बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि रूस शांति चाहता है, लेकिन “तैयार” भी है।
🟠 भारत-रूस रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है मॉस्को
अपनी भारत यात्रा से पहले पुतिन ने कहा कि रूस भारत और चीन जैसे “मुख्य साझेदारों” के साथ रिश्ते और गहरे करना चाहता है।
उन्होंने संकेत दिया कि—
- भारत से आयात बढ़ाने पर विशेष चर्चा होगी
- व्यापार घाटे को कम करने के लिए रूस अतिरिक्त भारतीय उत्पाद खरीदने को तैयार है
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव का बयान यह साफ करता है कि भारत लंबे समय से व्यापार असंतुलन को लेकर चिंता जता रहा है, और रूस अब इसे ठीक करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
🟠 पश्चिम पर पुतिन का हमला: “यूरोप शांति नहीं, युद्ध चाहता है”
पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों को निशाने पर लेते हुए कहा कि—
- यूरोपीय देश शांति एजेंडा में दिलचस्पी नहीं रखते
- युद्ध को बढ़ावा देने के लिए बार-बार माहौल बनाया जा रहा है
- रूस किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है
यह बयान वैश्विक राजनीति की गर्माहट बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
🟠 राष्ट्रीय मुद्राओं में ट्रेड का फार्मूला—डॉलर निर्भरता कम करने की तैयारी
पेस्कोव ने बताया कि भारत और रूस डॉलर के बजाय राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान प्रणाली पर चर्चा करेंगे।
यह कदम दोनों देशों को—
- पश्चिमी प्रतिबंधों से बचाएगा
- व्यापार प्रक्रिया को सरल करेगा
- रूबल और रुपये के उपयोग को बढ़ाएगा
रूस ने स्वीकार किया कि भारत तेल खरीदते समय बड़े पैमाने पर रुपये जमा करता है, लेकिन रूस के पास रुपये खर्च करने के सीमित विकल्प हैं—इसलिए व्यापार संतुलन बेहद जरूरी है।
🟠 रक्षा सौदों में बड़ा विस्तार: ब्रह्मोस से S-400 तक नई संभावनाएं
पुतिन-मोदी वार्ता में रक्षा सहयोग बेहद अहम रहेगा। चर्चा जिन बिंदुओं पर हो सकती है—
- ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त उत्पादन बढ़ाना
- अतिरिक्त S-400 सिस्टम की आपूर्ति
- Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर सहयोग
- छोटे आकार वाले न्यूक्लियर रिएक्टर
- ऊर्जा सुरक्षा पर रूस-भारत साझेदारी का विस्तार
यह भारत की रक्षा क्षमता में अगले दशक तक गहरी भूमिका निभा सकता है।
🟠 अमेरिका-भारत संबंधों के खराब दौर में पुतिन का भारत दौरा
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब—
- भारत–अमेरिका संबंध दो दशकों के “सबसे कठिन दौर” में बताए जा रहे हैं
- तेल खरीद जारी रखने पर अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ बढ़ा दिया
- प्रतिबंधों के दबाव के कारण भारत ने रूसी तेल आयात थोड़ा कम किया है
रूस का कहना है कि यह कमी अस्थायी है और वह पश्चिमी प्रतिबंधों का असर “निष्प्रभावी” करने में सक्षम है।
🟠 भारत-पुतिन मुलाकात से बड़े मोड़ की उम्मीद
पुतिन की यात्रा से—
- व्यापार में बड़ा संतुलन
- ऊर्जा सुरक्षा में नए समझौते
- रक्षा सहयोग की नई दिशा
- और डॉलर-फ्री ट्रेडिंग सिस्टम
—जैसे बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।
पुतिन के ताजा बयानों ने साफ कर दिया है कि भारत-रूस साझेदारी अब नए अध्याय की ओर बढ़ने वाली है।