बांग्लादेश पर बढ़ा कर्ज़ी संकट—14% उछाल के बाद देश आर्थिक पतन की कगार पर, दिवालियापन का खतरा गहराया….
कभी विकास मॉडल के तौर पर सराहा गया बांग्लादेश अब गहरे आर्थिक संकट में फंस गया है। तेजी से बढ़ते कर्ज़, गिरती राजस्व आय, राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर निवेश माहौल ने देश की अर्थव्यवस्था को डगमगा दिया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी कर्ज़ में पिछले एक साल में 14% की तेज बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद बांग्लादेश का कर्ज़ स्तर ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुका है। आर्थिक विश्लेषक इसे देश के लिए “दिवालियापन की चेतावनी” बता रहे हैं।
विकास मॉडल से संकटग्रस्त राष्ट्र: बांग्लादेश की आर्थिक गिरावट
कुछ साल पहले तक बांग्लादेश की आर्थिक प्रगति को दक्षिण एशिया का नया मानक माना जा रहा था। प्रति व्यक्ति आय और एक्सपोर्ट ग्रोथ के आधार पर देश की तुलना भारत से की जाने लगी थी। लेकिन मौजूदा हालात बिल्कुल उलट हैं—कमज़ोर राजस्व संग्रह, निवेश में गिरावट और राजनीतिक तनाव ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है।
एक साल में 14% बढ़ा कर्ज़: आंकड़े बने खतरे की घंटी
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट और वित्त विभाग के डेटा बताते हैं कि जून 2025 तक बांग्लादेश का कुल सरकारी कर्ज़ बढ़कर 21,44,340 करोड़ टका हो गया है, जो बीते वर्ष के मुकाबले 14% अधिक है।
विदेशी कर्ज़: 9,49,000 करोड़ टका
घरेलू कर्ज़: 11,95,000 करोड़ टका
भारतीय मुद्रा में यह आंकड़ा लगभग 15.68 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।
राजनीतिक अस्थिरता ने बढ़ाया घाटा, कमाई पीछे—खर्च आगे
बांग्लादेश में लगातार राजनीतिक तनाव और कमजोर कानून व्यवस्था की वजह से अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। सरकारी खर्च बढ़ रहा है, जबकि राजस्व अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पा रहा। अकेले एक साल में 2,50,000 करोड़ टका का कर्ज़ बढ़ा, जो देश के इतिहास में सबसे तेज उछालों में से एक है।
बांग्लादेश बैंक के अनुसार, सिर्फ बैंकों से ही सरकार ने वित्त वर्ष 2025 में 72,372 करोड़ टका उधार लिया।
सत्ता परिवर्तन के बाद अर्थव्यवस्था धीमी, विकास दर 3.5% पर अटकी
नए राजनीतिक समीकरण बनने के बाद अर्थव्यवस्था की रफ्तार और धीमी हो गई। विकास दर घटकर सिर्फ 3.5% के आस-पास रहने का अनुमान है।
सबसे चिंताजनक पहलू है टैक्स-टू-जीडीपी रेश्यो, जो मात्र 7–7.5% है—दक्षिण एशिया में सबसे कम, जबकि भारत में यह लगभग 12% है।
भारी विदेशी कर्ज़ और गिरता निर्यात: दिवालिया होने का बढ़ा खतरा
IMF ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश का विदेशी कर्ज़ अब “मध्यम स्तर का जोखिम” बना चुका है। देश का डेट-टू-एक्सपोर्ट रेश्यो 162% तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित सीमा से काफी ऊपर है।
जबकि निर्यात पहले से ही दबाव में है—ऐसे में कर्ज़ चुकाने की क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बांग्लादेश को श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की ओर धकेल सकती है।